religion, science and Yoga | धर्म, विज्ञान और योग
|
सिलवर स्ट्रीट चर्च के बर्तानी पादरी साइमन का कहना है कि योग गैर-ईसाई है। टॉन्टन स्थित सिल्वर स्ट्रीट बैपटिस्ट चर्च और सेंट जेम्स एंग्लिकन चर्च के पादरियों द्वारा योग की कक्षाओं पर बहुत पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है।
ब्रिटेन के ईसाई धर्मगुरुओं का कहना है कि योग से शरीर में शैतानी आत्माओं के प्रवेश का खतरा रहता है और योग गैर-ईसाई है। ब्रिटेन में कैथोलिकों में शैतानी ताकतें भगाने वाले गुरु फादर जेरेमी जेविस के अनुसार, योग लोगों को नशे, आसुरी संगीत और नग्नता की ओर ले जाता है। यह विद्या आज लाखों युवाओं को बरबाद कर रही है।
हाल ही में मलेशिया की नेशनल फतवा काउंसिल द्वारा योग के खिलाफ फतवा जारी किया गया है। फतवे में कहा गया है कि योग में हिंदू धर्म की प्रार्थनाओं का महत्वपूर्ण स्थान है और यह भगवान के नजदीक ले जाने का माध्यम समझा जाता है। इसे बुतपरस्ती बताते हुए इस्लाम विरोधी कहा गया है और इस कारण से मुसलमानों को योग से दूर रहने की हिदायत दी गई है।
|
योग से उन तमाम लोगों की दुकानदारी खत्म होने का खतरा बढ़ जाता है जो मनुष्य के दुःख पर निर्मित हैं। यदि लोग बीमार न होंगे तो अस्पताल, मेडिकल और इनसे जुड़े तमाम धंधे पिटने लगेंगे। यदि लोग दुःखी न होंगे तो उनमें ईश्वर के प्रति आस्था का ग्राफ भी गिरने लगेगा। ईश्वर को नहीं मानने वाले लोग संगठित धर्म को पोषित भी नहीं करेंगे तो ऐसे में धर्म का क्या होगा?
योग धर्म या विज्ञान : धर्म के सत्य, मनोविज्ञान और विज्ञान का सुव्यवस्थित रूप है योग। योग की धारणा ईश्वर के प्रति आपमें भय उत्पन्न नहीं करती और जब आप दुःखी होते हैं तो उसके कारण को समझकर उसके निदान की चर्चा करती है। योग पूरी तरह आपके जीवन को स्वस्थ और शांतिपूर्ण बनाए रखने का एक सरल मार्ग है। यदि आप स्वस्थ और शांतिपूर्ण रहेंगे तो आपके जीवन में धर्म की बेवकूफियों के लिए कोई जगह नहीं बचेगी।
योग ईश्वरवाद और अनिश्वर वाद की तार्किक बहस में नहीं पड़ता वह इसे विकल्प ज्ञान मानता है, अर्थात मिथ्याज्ञान। योग को ईश्वर के होने या नहीं होने से कोई मतलब नहीं किंतु यदि किसी काल्पनिक ईश्वर की प्रार्थना करने से मन और शरीर में शांति मिलती है तो इसमें क्या बुराई है।
|
|
|

