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Written By अनिरुद्ध जोशी

रोग होने से पहले ही रोग की पहचान करने की सटीक विद्या...

रोग होने से पहले ही रोग की पहचान करने की सटीक विद्या... | antar swar mudra yoga
व्यक्ति आधुनिक जीवन शैली में इतना व्यस्त है कि उसे अपने शरीर का भान नहीं रहता। यही वजह है कि रोग से ग्रस्त हो जाने के बाद ही उसे पता चलता है कि शरीर रोगी बन गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। अब उसे डॉक्टर या भगवान ही बचा सकता है। लेकिन योग में एक ऐसी विद्या है जिससे रोग होने की आपको पूर्व सूचना मिल जाता है। इस विद्या का नाम है अंतर स्वर मुद्रा योग।
 
अंतर स्वर मुद्रा का अभ्यस्त व्यक्ति रोग की पहचान रोग होने से पहले ही कर लेता है और संभल जाता है। शरीर के भीतर की आवाज या हरकत को पहचानने की शक्ति प्रदान करती है अंतर स्वर मुद्रा। 
 
अंतर स्वर मुद्रा की विधि :- सर्व प्रथम किसी भी सुखासन में बैठकर अपनी दोनों आंखों को बंद कर लें। फिर अपने दोनों हाथों से अपने दोनों कानों को जोर से बंद करें जिससे की बाहर की कोई भी आवाज आपको सुनाई ना दें। कुछ देर बाद कानों में अजीब-सी सांय-सांय की आवाज गूंजने लगेगी। इसे ही अंतर स्वर मुद्रा कहते हैं। इसका अभ्यास बढ़ने के साथ ही सांय-सांय की आवाज बंद होकर शरीर के भीतर के प्रत्येक अंग की आवाज स्पष्ट सुनाई देने लगेगी। फिर धीरे-धीरे आवाज के साथ ही प्रत्येक अंग के स्वस्थ या रोगी होने महसूस होने लगेगा। 
 
समयावधि :- अंतर स्वर मुद्रा को प्रतिदिन सुबह 15 मिनट और शाम को 15 मिनट तक कर सकते हैं। फिर धीरे-धीरे इस मुद्रा को करने का समय बढ़ाते जाएं।
 
इसका लाभ :- इस मुद्रा को करने से व्यक्ति धीरे-धीरे शरीर की सूक्ष्म से सूक्ष्म आवाज और तरंगों को पहचानने लगता है। इसके माध्यम से साधक के शरीर में ऊर्जा शक्ति बढ़ने लगती हैं और वह निरोगी रहता है। यह मुद्रा पांचों इंद्रियों को शक्ति तथा मस्तिष्क को शांति प्रदान करती है।
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