कन्धा टूटा लेकिन जज्बा नहीं, योद्धा की तरह लड़ी भारत की शेरनी
बुलंद हौसले की मिसाल हैं हरियाणा की रेसलर निशा
Nisha Dahiya Paris Olympic 2024
Nisha Dahiya Paris Olympic 2024: पैरिस ओलंपिक में वुमेंस रेसलिंग के 68 किलोग्राम भारवर्ग में भारत की निशा दहिया को क्वार्टरफाइनल में उत्तर कोरिया की सोल गम पाक से हार का सामना करना पड़ा। मुकाबले की शुरुआत में वह सोल पर भारी पड़ रही थीं। लेकिन चोट के बाद मैच उनके हाथों से फिसलता चला गया। भले ही इस मुकाबले में निशा जीत नहीं पाई लेकिन भारत की ये बेटी आखिर तक एक योद्धा की तरह डटी रही।
उनकी आँखों में देश के नाम जीत न कर पाने का मलाल साफ़ दिख रहा था। लेकिन भारत की ये शेरनी एक जाबांज योद्धा की तरह आखिर तक डटी रही ये पूरे देश और दुनिया ने देखा। देश की बेटी की इस हिम्मत को हम सलाम करते हैं।
Nisha Dahiya: बुलंद हौसले की मिसाल हैं हरियाणा की रेसलर निशा
पानीपत के गांव अदियाना की रहने वाली निशा दहिया ने बचपन से ही कुश्ती में करियर बनाने का मन बना लिया था। निशा के पिता एक किसान हैं, जिनका सपना था कुश्ती में नाम कमाने का, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाए। वहीं, निशा ने अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए कुश्ती के खेल को चुना। परिवार की सबसे छोटी बेटी निशा को मां-पिता के और पूरे परिवार का साथ मिला। 12 साल की उम्र से निशा ने कुश्ती की ट्रेनिंग शुरू कर दी थी और फिर कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। 2014 में निशा ने अंडर-16 एशियन खेल थाईलैंड में पहला मेडल जीता था।
निशा के करियर में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब डोपिंग परीक्षण में फेल होने के कारण उन पर चार साल का प्रतिबंध लगा। यह समय उनके लिए काफी मुश्किल। इस मुश्किल दौर से उबरते हुए, निशा ने 2019 में उम्र-23 नेशनल चैंपियनशिप जीतकर शानदार वापसी की।

