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Written By WD Feature Desk

घर खरीदने के पहले जरूर जान लें कि किस टाइप का मकान नहीं खरीदें

घर खरीदने के पहले जरूर जान लें कि किस टाइप का मकान नहीं खरीदें - What type of house not to buy
Vastu tips for house buying : बना बनाया मकान खरीदने के विचार कर रहे हैं तो पहले वास्तु के अनुसार कुछ नियम जरूर जान लें अन्यथा घर में शांति की जगह अशांति फैल जाएगी। क्योंकि घर खरीदने के पहले आपको आपकी कुंडली के ग्रहों की स्थिति भी जानना जरूरी होती है। कई बार घर से कुंडली के ग्रह सुधार जाते हैं और कहते हैं कि आपकी कुंडली में ग्रह नक्षत्र अच्‍छे हैं लेकिन आपका घर सही नहीं है तो उनका अच्छा फल मिलने में रुकावट आती है। अत: जानें लाल किताब और वैदिक ज्योतिष के अनुसार वास्तु के 10 नियम।
 
1. मकान का मुख : दक्षिणमुखी मकान नहीं लेना चाहिए। यह आपकी जिंदगी को भले ही अभी सुकून दे लेकिन इसका जब फल मिलना प्रारंभ होता है तब यह सबकुछ हासिल किया हुआ छीन लेता है। इस मकान में अकाल मौत भी हो तो कोई बड़ी बात नहीं। खासकर यह कलह और रोग का घर होता है।
 
2. कार्नर या तीन ओर से खुला मकान : नुक्कड़ या तीन तरफ से खुला मकान भी ठीक नहीं होता है। ऐसे मकान में रहने वालों को धनहानी, परिवार में वैमनस्य, क्लेश और बिगड़ैल औलाद के कारण दुखी होना पड़ता है। इसी तरह कोने के मकान केतु का होता है। यह अच्छा भी हो सकता है और खराब भी। यदि तीन तरफ मकान एक तरफ खुला या तीन तरफ खुला हुआ और एक तरफ कोई साथी मकान या खुद उस मकान में तीन तरफ खुला होगा तो यह केतु का मकान होगा। केतु के मकान में नर संतानें लड़के चाहे पोते हों लेकिन कुल तीन ही होंगे। इस मकान में बच्चों से संबंधित, खिड़कियां, दरवाजे, बुरी हवा, अचानक धोखा होने का खतरा रहता है। हो सकता है कि मकान के आसपास इमली का वृक्ष, तिल के पौधे या केले का वृक्ष हो।
 
3. शौचालय : लाल किताब के अनुसार शौचालय में राहु का वास रहता है अत: इसे वास्तु अनुसार बनाकर साफ सुथरा रखना चाहिए। शौचालय और बाथरूम दोनों एकसाथ नहीं होना चाहिए। यदि घर खरीदते वक्त यह जरूर ध्यान दें कि शौचायल कहीं उत्तर या ईशान दिशा में तो नहीं बनी है।
 
4. सीढ़ियां : सीढ़ियों पर भी राहु का वास होता है। सीढ़ियां अगर सही दिशा में बनी हों, तो इस पर चढ़ने उतरने वाले दिन-रात प्रगति करते हैं। सीढ़ियों का प्रत्येक पायदान बराबर होना चाहिए और सीढ़ियां हमेशा विषम संख्या में हों। गलत दिशा में बनी सीढ़िया प्रगति में बाधक होती है।
 
5. मकान में गली या गलियारा : मकान के दाहिने, बाएं या पीछे कोई गली हो, तो उसे बंद नहीं करना चाहिए। वहां खेती या बागबानी भी नहीं करना चाहिए। गली में किसी भी प्रकार का अवरोध डालने से संतान के भविष्य पर बुरा असर पड़ता है। यदि कोई गली किसी कारण बंद करनी ही पड़े, तो प्रति वर्ष 5 किलो साबुत उड़द को जलधारा में बहाना चाहिए।
 
6. किचन : वास्तु विज्ञान के अनुसार रसोईघर आग्नेय कोण में होना शुभ फलदायी होता है। इस दिशा का स्वामी ग्रह शुक्र होता है। किचन यदि आग्नेय कोण में नहीं है तो इससे घर में रहने वाले लोगों की सेहत, खासतौर पर महिलाओं की सेहत पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। अन्न-धन की भी हानि होती है। इससे पाचन संबंधी अनेक बीमारियां हो सकती हैं। जहां किचन है वहां पर हवा और प्रकाश के आसान रास्ते होना चाहिए।  वास्तु के मुताबिक भूलकर भी घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में किचन नहीं बनाना चाहिए। किचन आग्नेय के अलावा उत्तर और पश्‍चिम दिशा में भी चल सकता है। बाकी की दिशाओं से वास्तुदोष निर्मित होता है। 
7. मकान के कोने : आठ कोने के मकान लंबी बीमारी, मुसीबत और मृत्यु को दर्शाता है। शनि अष्टम में होने के संकेत। 18 कोने के मकान है तो धन की हानि, विवाह का नहीं होना। विवाह हो जाए तो विधुर-विधवा योग बनते हैं। इसी तरह 3 और 13 कोने वाला मकान साजिश में बर्बादी को दर्शाता है। 5 कोने वाला मकान संतान की बर्बादी।
 
8. मकान के आसपास न हो ये : जहां घर खरीद रहे हैं वहां उसके आसपास यदि मदिरालय, जुआघर, मांस-मच्छी की दुकान, शोर मचाने वाली फैक्ट्री या अन्य कोई कारखाना, संगीतशाला, नृत्यशाला, नाला, अनावश्यक खंभे और नकारात्मक पेड़ या वृक्ष हैं तो वहां मकान नहीं खरीदना चाहिए क्योंकि यह सभी आपके जीवन में नकारात्मकता घोल देंगे और साथ ही जीवन में घटना दुर्घटना को जन्म देंगे।
 
8. तीन तरह के मकान : तीन तरह के मकान अच्छे नहीं होते शनि, राहु और केतु वाले मकान नहीं लेना चाहिए। अर्थात जिस मकान के आसपास कीकर, आम और खजूर के वृक्ष हो, मकान के भीतर तलघर हो, पीछे की दीवार कच्ची हो तो यह मकान खराब शनि का माना जाएगा। दूसरा कोई मकान सुनसान इलाके में हो, भीतर से डरावना लगता हो या घर के आसपास मांस या शराब की दुकान हो और जिसके आसपास बबूल और कैक्टस जैसे झाड़ या पौधे लगे हो वह खराब राहु का मकान होता है।
 
10. मकान के आसपास के वृक्ष, ग्रहों के मकान : तीन तरह के मकान अच्छे नहीं होते शनि, राहु और केतु वाले मकान नहीं लेना चाहिए। अर्थात जिस मकान के आसपास कीकर, आम और खजूर के वृक्ष हो, मकान के भीतर तलघर हो, पीछे की दीवार कच्ची हो तो यह मकान खराब शनि का माना जाएगा। दूसरा कोई मकान सुनसान इलाके में हो, भीतर से डरावना लगता हो या घर के आसपास मांस या शराब की दुकान हो और जिसके आसपास बबूल और कैक्टस जैसे झाड़ या पौधे लगे हो वह खराब राहु का मकान होता है।
 
इसी तरह कोने के मकान केतु का होता है। यह अच्छा भी हो सकता है और खराब भी। यदि तीन तरफ मकान एक तरफ खुला या तीन तरफ खुला हुआ और एक तरफ कोई साथी मकान या खुद उस मकान में तीन तरफ खुला होगा तो यह केतु का मकान होगा। केतु के मकान में नर संतानें लड़के चाहे पोते हों लेकिन कुल तीन ही होंगे। इस मकान में बच्चों से संबंधित, खिड़कियां, दरवाजे, बुरी हवा, अचानक धोखा होने का खतरा रहता है। हो सकता है कि मकान के आसपास इमली का वृक्ष, तिल के पौधे या केले का वृक्ष हो।- अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'