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Last Updated :मुरादाबाद , शुक्रवार, 8 अगस्त 2025 (12:18 IST)

मुरादाबाद में उफान पर रामगंगा, खेत, सड़कें और पुल जलमग्न, 50 गांवों से टूटा संपर्क

Ramganga river
Ramganga in spate in Moradabad: मुरादाबाद जिले में हो रही भारी बारिश और पहाड़ी इलाकों में लगातार जलभराव के चलते रामगंगा (Ramganga), ढेला और खो नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। रामगंगा नदी के उफान पर आने से गांव, खेत, सड़कें और पुल जलमग्न हो गए हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि न केवल ग्रामीण इलाकों का संपर्क टूट गया है बल्कि शहर तक बाढ़ का पानी दस्तक दे चुका है। प्रशासनिक तंत्र की सुस्त कोशिश और असहाय ग्रामीणों की पीड़ा देखकर यह कहा जा सकता है कि यह स्थिति हर साल सामने आती है, पर उससे कुछ सीखा नहीं जाता है।
 
गांवों का संपर्क टूटा, पुल बहा
 
मुरादाबाद-नैनीताल हाईवे पर स्थित थाना मूंढापांडे के क्षेत्र के भीकनपुर समेत 1 दर्जन से ज्यादा गांव रामगंगा की बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। भीकनपुर का मुख्य पुल का हिस्सा पानी में बह गया है जिससे लगभग 50 से अधिक गांवों का संपर्क कट गया है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें अब तक कोई सरकारी मदद नहीं मिली है। कुछ लोग अपने घरों में फंसे हुए हैं तो कुछ लोग सुरक्षित स्थानों पर पलायन कर चुके हैं।ALSO READ: वाराणसी : बाढ़ और बारिश के बावजूद काशी में श्रद्धालुओं की बाढ़
 
शहर तक घुसा रामगंगा का पानी
 
बाढ़ के पानी का प्रवेश अब केवल गांवों तक सीमित नहीं रह गया बल्कि मुरादाबाद शहर के लालबाग वार्ड 55 में पार्क को पार करता हुआ बस्ती तक पहुंच चुका है। इसका मतलब यह है कि यदि बारिश और बढ़ी तो शहरी आबादी भी गंभीर खतरे में पड़ सकती है। जब ग्रामीण परेशान हैं उन तक मदद नही पहुंच पा रही है तो क्या प्रशासन के शहरी इस स्थिति से निपटने की कोई ठोस योजना है? या एक बार फिर 'स्थिति पर नजर रखी जा रही है' जैसी औपचारिक घोषणाओं तक ही सीमित रहेंगे उपाय?
 
डूबी महिला, रेस्क्यू में जुटी गोताखोर टीम
 
गांव भीकनपुर में एक महिला खेत में चारा लेने गई थी, जो अचानक बाढ़ के पानी में डूब गई। देर रात तक उसका कोई सुराग नहीं लग पाया। आज सुबह नाव और स्टीमर की मदद से महिला की तलाश जारी है। प्रशासन ने मुरादाबाद पीएसी 23वीं वाहिनी की गोताखोरों की टीम को मौके पर भेजा है।ALSO READ: चित्रकूट में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान तक पहुंची, सड़कों पर तैर रही है नाव, बाढ़ में फंसे लोगों का किया जा रहा रेस्क्यू
 
ठाकुरद्वारा मार्ग बना जलमार्ग
 
रामनगर मार्ग पर स्थित ठाकुरद्वारा इलाके में सड़कें पूरी तरह डूब चुकी हैं। दोपहिया वाहन चालकों को अपनी गाड़ियां ट्रैक्टरों या बैलगाड़ियों में लादकर पार कराना पड़ रहा है। हालांकि बड़े वाहन तथा जोखिम उठाकर लोग सड़कों से गुजरने का प्रयास कर रहे हैं जिसे देखकर यह कहा जा सकता है कि आधुनिक भारत की सड़कों पर विकास की जगह पानी बह रहा है।ALSO READ: रपटे या पुल-पुलिया पर बाढ़ का पानी हो तो पार न करें, CM मोहन यादव की जनता से अपील
 
ग्रामीण बोले, हालात बेहद गंभीर
 
ग्रामीणों का कहना है कि हालात हर दिन बद से बदतर होते जा रहे हैं। अनेक पाल सिंह, निवासी भीकनपुर ने बताया कि पिछले साल भी बाढ़ आई थी, लेकिन इस बार हालात पूरी तरह से बेकाबू हैं। सब कुछ पानी में डूब गया है। वहीं सुमीत यादव ने बताया कि चारा तक लाना मुश्किल हो गया है, बच्चे भूखे हैं और कहीं से आने-जाने का रास्ता नहीं है। लगता है सरकार से मदद नहीं मिलेगी इसलिए अपनी मदद खुद करनी पड़ेगी।ALSO READ: यूपी में गंगा, यमुना और शारदा समेत कई प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर
 
प्राकृतिक आपदा या मानवजनित लापरवाही?
 
रामगंगा, ढेला और खो नदियों का जलस्तर बढ़ना कोई नई बात नहीं है। मानसून हर साल आता है, नदियां उफान पर आती हैं जिसमें सड़क, पुल और घर बह जाते हैं, लोग सड़क पर आ जाते हैं। लेकिन प्रश्न यह उठता है कि क्या हमने समय रहते बाढ़ से निपटने की तैयारी की थी? इस साल भी वही स्थिति है। भीकनपुर गांव में पुल का हिस्सा नदी में बह गया, जो 50 से अधिक गांवों को आपस में जोड़ता था। मुख्य सड़क से जुड़ने वाले संपर्क मार्ग टूट चुके हैं जिसके चलते लोग घरों में कैद हो गए और अब उन्हें इंतजार है सरकारी मदद का।
 
प्रशासन अलर्ट मोड पर
 
मुरादाबाद प्रशासन पानी की स्थिति को देखकर सतर्क है। सभी विभागों को तैयार कर दिया गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का स्थानीय अधिकारी दौरा कर रहे हैं। लेकिन ग्रामीणों को अब तक राहत और बचाव कार्यों का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। बाढ़ का पानी लगातार बढ़ रहा है और अगर बारिश का यही सिलसिला जारी रहा तो हालात और ज्यादा खराब हो सकते हैं।
 
क्या सीखा हमने पिछले वर्षों से?
 
हर साल बाढ़ आती है, हर साल नुकसान होता है, लेकिन क्या हमने उससे कुछ सीखा? क्या जल प्रबंधन की कोई नीति बनी? जब तक हम केवल राहत कार्यों पर भरोसा करते रहेंगे और दीर्घकालिक समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाएंगे, तब तक बाढ़ के पानी में जिले हर साल इसी तरह डूबते रहेंगे और खेत, घर और सड़कें पानी में बहते रहेंगे।
 
Edited by: Ravindra Gupta
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