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दूध, सोना, पेट्रोल-डीजल के बाद अब किन चीजों पर लगेगा महंगाई का झटका, क्या कदम उठा रही है मोदी सरकार

inflation in India
देश में महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। दूध, सोना और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद अब आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों पर भी बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और आयात लागत बढ़ने के कारण आने वाले दिनों में खाने के तेल, दवाइयों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दाम और बढ़ सकते हैं।
 
एक्सपर्ट्‍स का मानना है कि यदि वैश्विक हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो आने वाले महीनों में महंगाई आम लोगों की जेब पर और भारी पड़ सकती है। 

और महंगा हो सकता है पेट्रोल

एनर्जी मार्केट के एक्सपर्ट्‍स का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। अनुमान है कि पेट्रोल की कीमत में 10 से 14 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इससे परिवहन लागत बढ़ेगी और इसका असर हर क्षेत्र पर दिखाई देगा। हाल ही में तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद ट्रांसपोर्ट, टैक्सी, बस किराया और माल ढुलाई की लागत बढ़ने लगी है।

खाने का तेल भी हो सकता है महंगा 

भारत खाद्य तेल के आयात पर काफी हद तक निर्भर है। वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी के कारण खाने के तेल की कीमतों में 5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की आशंका है। इसका सीधा असर घरेलू रसोई बजट पर पड़ेगा। सरसों, सोयाबीन और पाम ऑयल समेत कई खाद्य तेलों के दाम पहले ही बढ़ने लगे हैं। व्यापारियों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय संकट लंबा चला तो कीमतों में और तेजी आ सकती है।
 

रोजमर्रा की चीजें भी होंगी महंगी

एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक  पेट्रोल-डीजल महंगा होने का सबसे बड़ा असर रोजमर्रा की वस्तुओं पर पड़ता है। ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से दूध, सब्जियां, फल, अनाज, पैकेज्ड फूड और एफएमसीजी उत्पादों की कीमतों में 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। खुदरा बाजार में पहले से ही कई कंपनियां उत्पादन और परिवहन लागत बढ़ने की बात कह चुकी हैं। ऐसे में आने वाले समय में उपभोक्ताओं को हर महीने अधिक खर्च करना पड़ सकता है।

दवाइयों के दाम बढ़ने की भी आशंका

 
फार्मा सेक्टर भी बढ़ती लागत के दबाव से अछूता नहीं है। कई दवाओं में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल विदेशों से आयात किया जाता है। डॉलर महंगा होने और सप्लाई लागत बढ़ने के कारण दवाइयों की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक अगर आयात लागत और ऊर्जा खर्च बढ़ते रहे तो आवश्यक दवाओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।

सरकार की नजर हालात पर

केंद्र सरकार लगातार हालात की समीक्षा कर रही है। ईंधन बचत, आयात निर्भरता कम करने और वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों से 1 साल तक गैर जरूरी सोने की खरीदारी टालने, विदेशी यात्राएं कम करने और जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम अपनाने की अपील की है। Edited by : Sudhir Sharma
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