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भोजशाला कमाल मौला मस्जिद नहीं माता वाग्देवी मंदिर, हाईकोर्ट के फैसले की 8 बड़ी बातें
धार भोजशाला को लेकर सैकड़ों चल रहे विवाद पर शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। जबलपुर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि भोजशाला परिसर मंदिर ही है। आज का हाईकोर्ट का फैसला कई मायनों में ऐतिहासिक है। हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के फैसले की आठ बड़ी बातें क्या है?
1-हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने घोषित किया है, कि "भोजशाला एवं कमाल मौला मस्जिद" का विवादित परिसर 18 मार्च 1904 से 1958 के अधिनियम के अंतर्गत संरक्षित स्मारक है।
2-हाईकोर्ट ने विवादित परिसर के धार्मिक स्वरूप को "माता वाग्देवी (सरस्वती) के मंदिर सहित भोजशाला" माना है।
3-आर्किओलॉजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया (एएसआई) के निदेशक द्वारा 7 अप्रैल 2003 को पारित आदेश के उस भाग को अपास्त कर दिया गया है, जिसमें हिन्दू समुदाय के पूजा–अधिकारों को सीमित किया गया था तथा मुस्लिम समुदाय को नमाज की अनुमति प्रदान की गई थी।
4-भारत सरकार एवं एएसआई को भोजशाला मंदिर के प्रशासन, प्रबंधन और संस्कृत शिक्षा की व्यवस्था के संबंध में निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही आदेशित किया है, कि एएसआई सम्पूर्ण परिसर के संरक्षण, प्रबंधन एवं धार्मिक गतिविधियों के विनियमन की सर्वोच्च निगरानी संस्था बनी रहेगी।
5-न्यायालय ने एएसआई को संरक्षण, संवर्धन एवं धार्मिक प्रवेश के नियमन पर पूर्ण पर्यवेक्षणीय अधिकार प्रदान किए हैं।
6-लंदन संग्रहालय में स्थापित माँ सरस्वती की प्रतिमा को भारत वापस लाकर भोजशाला परिसर में पुनः स्थापित करने संबंधी मांग पर न्यायालय ने कहा कि भारत सरकार प्रस्तुत अभ्यावेदनों पर विधिसम्मत विचार कर सकती है।
7-मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों की रक्षा हेतु न्यायालय ने कहा कि यदि संबंधित पक्ष धार जिले में मस्जिद अथवा नमाज स्थल निर्माण के लिए भूमि आवंटन का आवेदन प्रस्तुत करता है, तो राज्य सरकार विधि अनुसार उपयुक्त एवं स्थायी भूमि आवंटन पर विचार कर सकती है।
8-न्यायालय ने हिन्दू फ्रंट फॉर जस्टिस एवं कुलदीप तिवारी द्वारा दायर याचिकाओं को स्वीकार किया, जबकि मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी, काजी जकुल्लाह एवं अन्य द्वारा दायर याचिकाएं एवं अपीलें निरस्त कर दी गईं।
