पढ़ि‍ए, निदा फाज़ली की 5 मशहूर नज़्में

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बदला न अपने आपको जो थे वही रहे
मिलते रहे सभी से अजनबी रहे
अपनी तरह सभी को किसी की तलाश थी
हम जिसके भी करीब रहे दूर ही रहे

दुनिया न जीत पाओ तो हारो न खुद को तुम
थोड़ी बहुत तो जेहन में नाराज़गी रहे

गुज़रो जो बाग से तो दुआ मांगते चलो
जिसमें खिले हैं फूल वो डाली हरी रहे
हर वक्त हर मकाम पे हंसना मुहाल है
रोने के वास्ते भी कोई बेकली रहे

 

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