aaj ka sher ahmed faraz | मैं किसको आँख भरकर देखता
डूबने वाला था, और साहिल पे चेहरों का हुजूम,
पल की मौहलत थी, मैं किसको आँख भरकर देखता - अहमद फ़राज़
पल की मौहलत थी, मैं किसको आँख भरकर देखता - अहमद फ़राज़
