1. मनोरंजन
  2. टीवी
  3. आलेख

मिसेज कौशिक बनाम पाँचवीं बहू

मिसेज कौशिक की पाँच बहुएँ
प्रत्येक सास की अपनी सोच होती है कि उसकी बहू कैसी होनी चाहिए। आदर्श और वास्तविक स्थिति के बीच का विरोधाभास हमेशा रोचक स्थितियाँ निर्मित करता आया है। जी टीवी पर 20 जून से शुरू हो रहे धारावाहिक मिसेज कौशिक की पाँच बहुएँ दो ऐसी महिलाओं की कहानी है जो जीवन को एकदम अलग दृष्टिकोण से देखती हैं। एक सख्त और अनुशासन प्रिय है तो दूसरी थोड़ी बागी प्रवृत्ति की। जी टीवी के फिक्शन हेड प्रोग्रामिंग सुकेश मोटवानी का कहना है ‘यह शो एक हल्का-फुल्का ड्रामा है जो दो महिलाओं के बीच के रिश्ते को दिलचस्प अंदाज में प्रस्तुत करता है।‘

PR


क्या है कहानी?
मिसेज कौशिक ने एक संयुक्त राजस्थानी परिवार की बागडोर को कुशलतापूर्वक थाम रखा है। अपने पति, पाँच बेटो और चार बहुओं की जिंदगी से जुड़े सारे फैसले वे लेती हैं। वे अनुशासित, सख्त नियमों का पालन करने वाली महिला हैं।

मिसेज कौशिक को अपने सबसे छोटे बेटे कार्तिक के लिए सुशील बहू की तलाश है। उन्हें ऐसी बहू चाहिए जो ईमानदार, सीधी-सादी और कभी न झूठ बोलने वाली हो। कार्तिक को लवली से प्यार हो जाता है जो मिसेज कौशिक की आदर्श बहू की परिभाषा पर खरी नहीं उतरती।

लवली उन्मुक्त है। मौज-मस्ती उसे पसंद है। वह अपने नियम खुद बनाने में यकीन रखती है। अगर किसी को नुकसान न पहुँच रहा हो तो वह झूठ भी बोल लेती है। जब लवली और मिसेज कौशिक आमने-सामने होती हैं तो गुदगुदाने वाले पल दर्शकों को देखने को मिलेंगे।

मिसेज कौशिक की भूमिका निभाई है विभा छिब्बर ने, जिन्हें दर्शक चक दे इंडिया, साँवरिया और गजनी जैसी फिल्मों में देख चुके हैं। जबकि लवली बनी हैं रागिनी नंदवानी।

PR


हास्य भूमिका करने की ख्वाहिश पूरी
मिसेज कौशिक भले ही लीड रोल है, लेकिन उनके पति सत्यदेव कौशिक का रोल भी महत्वपूर्ण नहीं है। इसे निभाया है प्रसिद्ध अभिनेता राजीव वर्मा ने। अपने इस रोल के बारे में राजीव ने बताया ‘कई दिनों से हास्य रोल करने की मेरी ख्वाहिश इस धारावाहिक के जरिये पूरी होने जा रही है। सास-बहू का धारावाहिक होने के बावजूद यह एक अलग अंदाज में इस रिश्ते को दिखाएगा।‘

राजीव के मुताबिक टीवी चैनलों ने रिसर्च के जरिये ये निष्कर्ष निकला है कि सास-बहू आधारित धारावाहिकों को लोग पसंद करते हैं इसलिए इस रिश्ते पर आधारित धारावाहिक ज्यादातर देखने को मिलते हैं। विदेश में रहने वाले भारतीय इन धारावाहिकों के जरिये अपनी संस्कृति से जुड़ाव महसूस करते हैं।

25 वर्षों से टेलीविजन से जुड़े राजीव के मुताबिक छोटे परदे पर पहले के मुकाबले काफी बदलाव आ गए हैं। तकनीक बदल गई है। सेट महँगे बनाए जा रहे हैं और कलाकारों को अच्छा पैसा भी मिला रहा है। वे टीवी और फिल्मों के साथ-साथ स्टेज से भी जुड़े हुए हैं और उनके नए नाटक ‘वक्त के कराहते रंग’ की रिहर्सल भोपाल में आरंभ हो गई है।
लेखक के बारे में
समय ताम्रकर
समय ताम्रकर फिल्म समीक्षक हैं, जो फिल्म, कलाकार, निर्देशक, बॉक्स ऑफिस और फिल्मों से जुड़े पहलुओं पर गहन विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं।.... और पढ़ें