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Written By ND

एक खिलाड़ी, दो हसीनाएँ

बिग बॉस
- अनहद

IFM
बिग बॉस के घर से मोनिका बेदी का बाहर होना एक बार फिर यही साबित करता है कि रियलिटी शो में वोटिंग महिलाएँ करती हैं और जाहिर है महिलाएँ महिलाओं को वोट नहीं देतीं। यह उम्मीद करना भी फिजूल है कि महिलाएँ महिला को वोट दें, सो भी सुंदर महिला को।

सवाल यह है कि क्या राहुल महाजन बिग बॉस के घर से बाहर आने के बाद मोनिका बेदी से शादी करेंगे? जैसा कि वादा करते हुए उन्हें लोगों ने देखा है। किसी भी महिला पर एकदम से आसक्त हो जाना और उसके साथ जीने-मरने की कसमें खाने लगना एक बेहतर रणनीति रही, खासकर इस खेल में। जिस महिला पर राहुल महाजन फिदा होते थे या फिदा होने की एक्टिंग करते थे, वो महिला राहुल महाजन के खिलाफ नॉमीनेशन नहीं करती थी। पायल रोहतगी ने एक भी बार राहुल के खिलाफ वोट नहीं किया और मोनिका बेदी ने भी।

छेड़छाड़ और अर्ज़ों-मिन्नात (याचना) के सीन की टीआरपी बहुत होती है, सो राहुल टीवी पर छाए रहते थे। शो के लिए भी ऐसा आदमी बड़े काम का है, जो दिखाने लायक माल की पूर्ति करता रहे, सो वोटिंग कुछ भी रही हो, गेम शो वालों ने भी राहुल को बाहर नहीं होने दिया।

गौर कीजिए तो आपको इस गेम शो में भी फार्मूला फिल्मों के तत्व मिल जाएँगे। एक हीरो राहुल महाजन, एक हीरोइन (पहले पायल और बाद में मोनिका) एक विलेन राजा। बाकी के सब साइड हीरो। प्यार तो खैर आशुतोष और डायना में भी पनपा पर उसमें सचाई थी, गेम शो का घाघपन नहीं। दोनों ने एक-दूसरे से आई लव यू तक नहीं कहा। अब ऐसे कहीं गेम शो चलता है? यहाँ लाउडनेस चाहिए, मांसलता चाहिए। पाकीजा प्यार और बेगरज़ दोस्ती के लिए यहाँ कोई जगह नहीं है। यहाँ तो राहुल महाजन चाहिए जो पहले तो बेड टी लेकर बिस्तर के नजदीक हाजिर रहे और फिर जब फ़ाख़्ता जाल में फँस जाए, तो उससे बीसियों कपड़े धुलवाए और सब कुछ सूद के साथ वसूल कर ले।

ये गेम शो अब अपने अंतिम चरण में है। कुछ दिनों बाद सब बाहर हो जाएँगे। राहुल महाजन ने इतने दिन गेम में बने रहकर अपने लिए जो कुछ कमाया है, वो बहुत शुभ नहीं है। अपने मन में हर आदमी की छवि बेहतर होती है, फिर चाहे वो दुनिया का सबसे खराब व्यक्ति ही क्यों न हो। इसी आत्मछवि का प्रदर्शन करने के लिए राहुल महाजन इस गेम शो में आए हैं। नतीजा जो भी हो, सबने राहुल को बहुत अच्छी तरह से देख लिया है। खुद राहुल भी नहीं चाहते होंगे कि उन्हें इतनी अच्छी तरह देखा जाए। मुसीबत यह है कि राहुल की जो छवि बनी है, वो उनकी अपनी आत्मछवि से बिलकुल नहीं मिलती। दुनिया यह देखना चाहेगी कि क्या वाकई राहुल महाजन मोनिका बेदी से किए वादे निभाएँगे? पायल रोहतगी से उन्होंने जो क्रूरता भरा व्यवहार किया था, उसे देखते हुए बहुत उम्मीद नहीं है।

(नईदुनिया)