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Article-Ye Rishta Kya Kahlata Hai | अब अक्षरा क्या करेगी

ये रिश्ता क्या कहलाता है

अक्षरा
इन दिनों सारे धारावाहिकों में नायिकाएँ खासी परेशान है। खासकर स्टार के दो लोकप्रिय धारावाहिक 'बिदाई: बाबुल का सपना' और ' ये रिश्ता क्या कहलाता है' की नायिकाएँ। ये 'देवियाँ' जितनी सती सावित्री बनना चाहती है पासा ठीक उसके उलट पड़ जाता है। 'ये रिश्ता...' की अक्षरा बड़ी ननद की प्यार की पींगे बढ़वाने में ऐसी उलझी कि अपने ही प्यार को खो बैठी।

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अब जरूरत क्या थी दूसरों के मामलों में अपनी टाँग फँसाने की, मगर ये बेचारी आदत की मारी है। यूँ तो इस अभिनेत्री के साँवले-सलोने रूप ने दर्शकों का जी भर कर प्यार लूटा है। मगर ये स्टार वालों की जाने क्या रणनीति है कि काम करते-करवाते अभिनेत्रियों को इतना-इतना रूलाते हैं कि बेचारी के चेहरे का नमक ही जाता रहता है। पहले साधना(सारा खान) को रूला-रूला कर उसका नूर छीना और अब अक्षरा( ह‍ीना खान) की बारी है।

इस धारावाहिक में एक तो परंपरावाद की अति है। दूसरे, जैसा आमतौर पर मारवाड़ी-राजस्थानी-माहेश्वरी परिवारों में होता है सीधे-सीधे उसी को ग्लैमराइज किया है जबकि सही एंगल यह होता कि होना क्या चाहिए इन परिवारों में, यह दिखाया जाता। रूढ़‍ियों से चिपके रहने में किसी की‍ भलाई नहीं है मगर धारावाहिक धीमी गति से बढ़ता हुआ इसी रिवाज का पोषण कर रहा है।

अक्षरा की बड़ी ननद अपाहिज है। खूबसूरत भी है। उसके छोटे भाई नैतिक का दोस्त रोहित उसे सरेआम 'स्वीट हार्ट' पुकारता है मगर इस संबोधन से किसी को कोई आपत्ति नहीं हैं लेकिन जब वो सचमुच उसे 'स्वीट हार्ट' मानने लगता है तो परिवार की त्यौरियाँ चढ़ जाती है। धारावाहिक देखने वालों को भी इस रिश्ते को गले उतारने में थोड़ा वक्त लगा। ‍फिर भला कट्टर सिंघानिया परिवार कैसे इसे मान लेता। मगर हमारी समस्या ये अक्षरा है। ये लड़की सबको खुश रखना चाहती है। सबसे अच्छी बनना चाहती है। मायके में भी और ससुराल में भी। यह कैरेक्टर सरल-सहज है, मन को लूभाता है मगर इसकी एक आदत बड़ी खराब है वो है सबके पचड़े में पड़ना। सबकी समस्या का हल खोजने में लग जाना।

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अब पति नैतिक का विश्वास खो बैठी है और गुस्से के अतिरेक में उसने भी कह दिया कि जाती हो तो जाओ मायके, कोई रोकेगा नहीं और ये जमाने भर की समझदार, जो अपनी भाभी वर्षा को घर छोड़ने से रोकती है खुद बिना बताए आधी रात को मायके आ गई।

अब ये क्या बात हुई कि सच कि हिमायती, हमेशा सच्ची बोलकर मुसीबत में फँसने वाली मायके आकर झूठ बोलती है कि नैतिक एयरपोर्ट जाते हुए उसे छोड़कर गए हैं। अब ये तो इस सप्ताह पता चलेगा कि आगे क्या होगा और रिश्तों के भँवर में उलझी अक्षरा अब क्या करेगी? पता नहीं ये रिश्ते क्या कहलाते हैं जो सुलझ-सुलझ कर भी बार-बार उलझ जाते हैं। देखते हैं अक्षरा कब तक हैरान-परेशान होती रहेगी।
लेखक के बारे में
स्मृति आदित्य