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स्वामी विवेकानंद पुण्यतिथि : एक दिव्य आत्मा, जिसने पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति का डंका बजा दिया

बुधवार,जुलाई 3, 2019
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12 जनवरी सन्‌ 1863 को स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ। वे सदा अपने को गरीबों का सेवक कहते थे। 4 जुलाई सन्‌ 1902 को उन्होंने देह त्याग किया।
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श्री रामकृष्ण परमहंस के शिष्य स्वामी विवेकानंद एक ऐसे संत थे जिनका रोम-रोम राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत था। राष्ट्र के दीन-हीनजनों की सेवा को ही वे ईश्वर की सच्ची पूजा मानते थे।
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स्वामी विवेकानंद कहते हैं कि जिस पल मुझे यह ज्ञात हो गया कि हर मानव के हृदय में भगवान है। तभी से मैं अपने सामने आने वाले हर व्यक्ति में ईश्वर की छवि देखने लगा हूं और उसी पल मैं हर बंधन से छूट गया। हर उस चीज से जो बंद रखती हैं.., धूमिल हो जाती है और ...
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स्वामी विवेकानंद ने जन्म लेकर न केवल हिन्दू धर्म को अपना गौरव लौटाया अपितु विश्व फलक पर भारतीय संस्कृति व सभ्यता का परचम भी लहराया। 'नरेंद्र' से 'स्वामी विवेकानंद' बनने का सफर उनके हृदय में उठते सृष्टि व ईश्वर को लेकर सवाल व अपार जिज्ञासाओं का ही ...
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एक अविस्मरणीय हस्ती ने कोलकाता की 'सिमुलिया' नाम की पल्ली में 12 जनवरी सन् 1863 को सूर्य की प्रथम किरण के साथ श्री विश्वनाथ दत्त के घर जन्म लिया।
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जीवन परिचय : स्वामी विवेकानंद

शुक्रवार,जनवरी 11, 2019
स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी सन्‌ 1863 को हुआ। उनका घर का नाम नरेंद्र दत्त था। उनके पिता विश्वनाथ दत्त पाश्चात्य सभ्यता में विश्वास रखते थे।
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स्वामी विवेकानंद का मानना था कि धर्म किसी कोने में बैठ कर सिर्फ मनन करने का माध्यम नहीं है। इसका लाभ देश और समाज को भी मिलना चाहिए।’
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स्वामी विवेकानंद ने एक बार कहा था कि युवकों को गीता पढ़ने के बजाय फुटबॉल खेलना चाहिए। विवेकानंद कहते थे कि युवाओं की स्नायु पौलादी होनी चाहिए क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन निवास करता है।
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आधुनिक सदी में भारतीय अध्यात्म के प्रतीक रहे नरेंद्रनाथ दत्त का जन्म 12 जनवरी, 1863 को कोलकाता में हुआ।
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स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था। उन्हें संगीत, साहित्य और दर्शन में विवेकानंद को विशेष रुचि थी। तैराकी, घुड़सवारी और कुश्ती उनका शौक था।
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बात 1867 की है। एक ट्यूटर उन दिनों कोलकाता के गौर मोहन मुखर्जी लेन स्थित मकान पर एक बालक को रोज पढ़ाने आते थे। तब न तो उन ट्यूटर को तथा न ही किसी अन्य को पता था
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अपनी तेजस्वी वाणी के जरिए पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का डंका बजाने वाले स्वामी विवेकानंद ने केवल वैज्ञानिक सोच तथा तर्क पर बल ही नहीं दिया
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युगपुरुष, वेदांत दर्शन के पुरोधा, मातृभूमि के उपासक, करोड़ों युवाओं के प्रेरणास्रोत व प्रेरणापुंज स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में पिता विश्वनाथ दत्त और माता भुवनेश्वरी देवी के घर हुआ था।
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एक अविस्मरणीय हस्ती ने कोलकाता की 'सिमुलिया' नाम की पल्ली में 12 जनवरी सन् 1863 को सूर्य की प्रथम किरण के साथ श्री विश्वनाथ दत्त के घर जन्म लिया। कन्याओं के जन्म के बाद दत्त दंपत्ति ने इस बालक शिशु को भगवान शिव से मनौती स्वरूप मांगा था।
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तुम किसी को दोष मत दो। अगर तुम अपने हाथ आगे बढ़ा कर किसी की मदद कर सकते हो तो करो, अगर नहीं कर सकते हो तो अपने हाथ बांधकर खड़े रहो। अपने वालों को शुभकामनाएं दो और उन्हें उनके रास्ते जाने दो..।
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स्वामी विवेकानंद ने जितने युवाओं के हृदय को झंकृत किया, शायद उतना किसी और ने किया हो। श्री रामकृष्ण परमहंस के शिष्य स्वामी विवेकानंद एक ऐसे संत थे जिनका रोम-रोम राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत था। राष्ट्र के दीन-हीनजनों की सेवा को ही वे ईश्वर की सच्ची पूजा ...
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वर्तमान में भारत के युवा जि‍स महापुरुष के विचारों को आदर्श मानकर उससे प्रेरित होते हैं, युवाओं के वे मार्गदर्शक और भारतीय गौरव हैं स्वामी विवेकानंद।भारत की गरिमा को वैश्विक स्तर पर सम्मान के साथ बरकरार रखने के लिए स्वामी विवेकानंद के कई उदाहरण ...
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आधुनिक सदी में भारतीय अध्यात्म के प्रतीक एवं रामकृष्ण परमहंस के शिष्य रहे नरेन्द्रनाथ दत्त का जन्म 12 जनवरी, 1863 को कोलकाता में हुआ। वे कालांतर में स्वामी विवेकानंद के नाम से प्रख्यात हुए।
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स्वामी विवेकानंद की संपूर्ण ग्रंथावली दस खंडों में प्रकाशित हुई है। इसमें पांचवें खंड से प्रारंभ करके नौवें खंड तक पांच कड़ियों में विवेकानंद पत्रावली भी प्रकाशित है। मित्रों, सहचरों और परिजनों को लिखे इन पत्रों से स्वामीजी के व्यक्त‍ित्व का एक ...
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