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अमरावती- महाकाल वन में मरीचिनंदन कश्यप ने अपनी पत्नी सहित दुष्कर तपस्या की और वरदान पाया कि 'सूर्य और चंद्र की स्‍थिति तक पृथ्वी पर उनकी संतति अवश्य रहेगी।' देवता, असुर तथा मानव रूप उनकी समस्त प्रजा वृद्धि को प्राप्त हुई। यह महाकाल वन संपूर्ण ऐश्वर्य से युक्त हो गया। यहां पर समुद्र मंथन से प्राप्त दुर्लभ रत्नादि हैं। जो-जो भी इस संसार में दिव्य और अलौकिक वस्तुएं हैं, वे सभी इस महाकाल वन में प्राप्य हैं। समस्त देवता इस वन में प्रतिष्ठित हैं। यहां के नर-नारी भी देवताओं के समान हैं। संपूर्ण देवताओं के निवास के कारण यह नगरी अमरावती के नाम से प्रसिद्ध हो गई।



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