उज्जैन के हर नाम में एक कथा छुपी है... जरूर पढ़ें

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उज्जयिनी- एक समय दैत्यराज त्रिपुर ने अपने असाध्य तप के द्वारा ब्रह्मा को प्रसन्न कर लिया। त्रिपुर से प्रसन्न ब्रह्मा ने उसे देव, दानव, गंधर्व,‍ पिशाच, राक्षस आदि से अवध्यता का वरदान दे दिया। वर से संतुष्ट त्रिपुर ने ब्राह्मणों, ऋषियों और देवताओं का संहार करना आरंभ कर दिया। इससे समस्त देव उससे भयभीत हो गए तथा वे सभी शिव के पास गए। उन्होंने शिव से रक्षा के लिए प्रार्थना की, तब शिव ने त्रिपुरासुर से अवन्ती क्षेत्र में भयंकर युद्ध किया। उन्होंने अवन्ती नगरी में अपने पाशुपत अस्त्र से‍ त्रिपुरासुर के तीन टुकड़े कर उसे मार डाला। देवसेवित इस अवन्ती में त्रिपुरासुर उत्कर्षपूर्वक जीता गया। अतएव देवताओं और ऋषियों ने इसका नाम उज्जयिनी रख दिया। 
'उज्जयिनी' का शब्दश: अर्थ है- 'उत्कर्षपूर्ण विजय।' इस नगरी का 'उज्जयिनी' नाम ही अधिक प्रचलित है। पाली और प्राकृत ग्रंथों में भी इस नाम का बहुलता के साथ उल्लेख है। संस्कृत साहित्य के सभी ‍कवियों ने अपने ग्रंथों में प्राय: 'उज्जयिनी' नाम का प्रयोग किया है। आधुनिक युग में भी यही नाम अधिक प्रचलित है।
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