उज्जैन के हर नाम में एक कथा छुपी है... जरूर पढ़ें

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अवन्तिका- स्कन्द पुराण के के 43वें अध्याय में 'अवन्तिका' नाम पड़ने की कथा निम्नानुसार है- 'पूर्व समय में दैत्यों और देवताओं में युद्ध हुआ। इस युद्ध में देवता पराजित हो गए, तब पराजित देवों ने मेरू पर्वत पर स्‍थित विष्णु के पास आश्रय लिया। विष्णु ने उन्हें शक्ति एवं अक्षय पुण्य प्राप्त करके कुशस्थली नगरी में जाकर रहने को कहा। महाकाल वन में स्थित यह नगरी समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली है। यहां प्रत्येक कल्प में देवता, तीर्थ, औषधि, बीज तथा संपूर्ण प्राणियों का पालन होता है। यह पुरी सबका रक्षण करने में समर्थ है। यह पापों से रक्षा करती है अत: इसका नाम इस काल से (अवन्तिका) अवन्ति नगरी‍ हो गया है। 
'अव'-रक्षणे धातु रक्षा करने के अर्थ में प्रयुक्त होती है अत: 'अवन्तिका' का अर्थ है- 'रक्षा करने में समर्थ'। उज्जयिनी के समस्त नामों में 'अवन्ती' नाम ने अधिक प्रसिद्धि पाई। संस्कृत, पाली और प्राकृत साहित्यिक ग्रंथों में उज्जयिनी के साथ ही इस नाम का उल्लेख मिलता है। पौराणिक इतिहास के अनुसार हैहयों की शाखा अवन्तियों ने इस राज्य की स्थापना की और इसी कारण उनकी स्मृति में इसका नाम 'अवन्ती' हो गया।
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