महाबली राजा बलि के 10 रहस्य, जानिए...

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
मान्यता है कि प्राचीन काल में जब धरती का अधिकतर हिस्सा बर्फ से ढंका था तब आज के मिश्र, साऊदी अरब, सीरिया, इराक, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान, इसराइल आदि को पातालपुरी कहा जाता था। यहीं कहीं रसातल भी होता था। दलजा, फरात और नील नदियों के आसपास ही सभ्यताएं बसती थी।
इसी पातालपुरी में राम के काल में अहिरावण का राज था। राम से पूर्व रसातल का क्षेत्र राजा बलि को सौंप दिया गया था। 4000 साल पुराने यहूदी धर्म का आधिपत्य मिस्र, इराक, इजराइल सहित अरब के अधिकांश हिस्सों पर राज था। उससे भी पूर्व यहां पर हिन्दुओं की कई जातियां निवास करती थी जिनका प्रमुख तीर्थ मक्का होता था। मान्यता अनुसार उस दौर में मक्का में एक ज्योतिर्लिंग था जिसे राजा बलि और शुक्राचार्य ने स्थापित किया था। यहीं पर राजा बलि की एक प्राचीन मूर्ति रखी थी और साथ ही कई देवी-देवताओं की मूर्तियां भी शिवलिंग के साथ स्थापित थी।

यहां के लोग इस काबा मंदिर की सात परिक्रमा करते थे। आज भी काबा से हटाई गई मूर्तियां इस्तांबूल के एक म्यूजियम में रखी है। पहले मक्का को मखा कहते थे जिसका संस्कृत में अर्थ होता है अग्नि। मक्का के काबा के पास ही जम जम का एक कुआं है जिससे जल लेकर लोग शिवलिंग पर चढ़ाते थे। कुछ विद्वान मानते हैं कि मक्का के इस काबा मंदिर का पुन: निर्माण राजा विक्रमादित्य ने करवाया था। शुक्राचार्य का एक नाम काव्या भी था यही काव्या बिगड़कर काबा हो गया। राजा बलि ने यहां कई वर्षों तक शासन किया। हालांकि इस बात में कितनी सच्चाई यह हम नहीं जानते क्योंकि यह शोध का विषय है।
संकलन : अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'



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