ब्रह्मांड में कौन किससे बड़ी शक्ति है?

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
देवी और देवता : की आत्मा ही अपने चेतना के विकासक्रम और कर्मानुसार में आगे बढ़कर देवता हो जाता है या देवलोक में जगह पाती है। वेद और पुराणों अनुसार देवी और देवता के रूप में जो शरीर मिलता है उसकी उम्र हजारों या लाखों वर्ष तक हो सकती है। यह निर्भर करता है कि व्यक्ति कितनी शक्ति अर्जित करने आया और अर्जित कर रहा है।
हो सकता है कि भविष्य में वह अपने कर्मों द्वारा पुन: मनुष्‍य योनी में चला जाए। दरअसल देवाता होने के लिए अथक प्रयास करना होते हैं। आत्मा जब जड़, प्राण, मन और उससे आगे विज्ञानमय कोष में स्थापित होती है तब ही वह श्रेष्ठ गति को प्राप्त होती है। बोधपूर्वक जीने से ही यह संभव होता है। जो व्यक्ति जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति में एक जैसा रहता है वही देवता होता है।



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