ब्रह्मांड में कौन किससे बड़ी शक्ति है?

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
: इस पर शोध किया जाने की और जरूरत है कि मनुष्य को किसने बनाया या कि वह प्राकृतिक विकासकृम में विकसित हुआ एक प्राणी है। मनुष्‍य प्राणियों से इसलिए श्रेष्ठ है क्योंकि वह अपनी जुबान, मस्तिष्क और अपने दोनों हाथों का अच्छे से प्रयोग करना जानता है। मनुष्य कई मायनों में प्राणी जगत से श्रेष्ठ क्यों है इस बारे में विस्तार से लिखे जाने की जरूरत नहीं। मनुष्य में मन सक्रिय होने के कारण वह मनुष्य है।
यह मनुष्य प्रकृति की अब तक की शुद्धतम कृति माना गया है। यह प्रकृति के सभी आकारों में अब तक का शुद्ध व ऐसा सुविधाजन आकार है जहाँ 'आत्मा' रहकर अपने को अन्यों से अधिक स्वतंत्र महसूस करती है। दूसरी ओर यह एक ऐसा आकार है जहाँ 'मन' का अवतरण आसान है।  उक्त आकार में अन्य प्राणियों की अपेक्षा 'मन' के अधिक जाग्रत होने से ही मनुष्य को मनुष्य या मानव कहा गया है। यही मनोमय कोश है। जगत के मनोमय कोश में मानव ही में 'मन' सर्वाधिक प्रकट है अन्यों में मन सुप्त है। मन भी कई तरह के होते हैं। यह विस्तार की बातें हैं।



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