अपार धन और ऐश्वर्य देते हैं हनुमानजी, जानिए कैसे...

अपार धन-संपत्ति : निधि का अर्थ सामान्यतः धन या ऐश्वर्य होता है। 9 निधियों का संबंध कुछ लोग धन और संपत्ति से मानते हैं अर्थात किस तरह का धन किसको और कितना मिलेगा। ये 9 निधियां हैं- 1. पद्म निधि, 2. महापद्म निधि, 3. नील निधि, 4. मुकुंद निधि, 5. नंद निधि, 6. मकर निधि, 7. कच्छप निधि, 8. शंख निधि और 9. खर्व या मिश्र निधि। माना जाता है कि नव निधियों में केवल खर्व निधि को छोड़कर शेष 8 निधियां पद्मिनी नामक विद्या के सिद्ध होने पर प्राप्त हो जाती हैं, परंतु इन्हें प्राप्त करना इतना भी सरल नहीं है।
चमत्कारिक 9 रत्न : कुछ लोग इन निधियों का संबंध किसी चमत्कारिक वस्तु से मानते हैं, जैसे- पद्म, महापद्म, शंख, मकर, कच्छ्प, मुकुंद, कुंद, नीलम और खर्व। यह जिसके पास है उसके पास अपार धन और संपत्ति रहेगी। कहते हैं कि ये चमत्कारिक वस्तुएं कुबेर की निगरानी में सुरक्षित रखी जाती हैं। तांत्रिक लोग इन वस्तुओं से कई तरह की शक्तियां प्राप्त कर लेते हैं और फिर उसका दुरुपयोग भी हो सकता है, क्योंकि इन सब वस्तुओं में अपार शक्ति निहित है। कहते हैं कि धरती और समुद्र में समाई इन चमत्कारिक वस्तुओं के पास होने से सभी तरह के संकट भी मिट जाते हैं।
* प्रमुख वस्तुएं जो अति दुर्लभ होती हैं, निधियां कहलाती हैं। इनका उल्लेख ब्रह्मांड पुराण एवं वायु पुराण में मिलता है। इनमें से 9 प्रमुख निधियों को चुनें तो वे होंगी रत्न किरीट अर्थात रत्न का मुकुट, केयूर- यानी बाहों में पहनने वाला सोने का आभूषण, नुपूर, चक्र, रथ, मणि, भार्या यानी पत्नी, गज, पद्म अथवा महापद्म।

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