काम की ये 12 रहस्यमय बातें, जानकर चौंक जाएंगे आप

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
ऐसे जानें पूर्व जन्म को : हमारा संपूर्ण जीवन स्मृति-विस्मृति के चक्र में फंसा रहता है। आप खुद को या दूसरों को भी यादों के माध्यम से ही जान पाते हों। उम्र के साथ स्मृति का घटना शुरू होता है, जो कि एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, अगले जन्म की तैयारी के लिए। यदि मोह-माया या राग-द्वेष ज्यादा है तो समझो स्मृतियां भी मजबूत हो सकती हैं। व्यक्ति स्मृति-मुक्त होता है तभी प्रकृति उसे दूसरा गर्भ उपलब्ध कराती है। लेकिन पिछले जन्म की सभी स्मृतियां बीज रूप में कारण शरीर के चित्त में संग्रहीत रहती हैं। विस्मृति या भूलना इसलिए जरूरी होता है कि यह जीवन के अनेक क्लेशों से मुक्ति का उपाय है। 
 
कैसे जानें पूर्व जन्म को : हिन्दू धर्म में पूर्व जन्म ज्ञान सिद्धि योग के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसे जाति स्मरण का प्रयोग भी कहा जाता है। इस योग की साधना करने से व्यक्ति को अपने अगले- पिछले सारे जन्मों का ज्ञान होने लगता है। योग कहता है कि ‍सर्वप्रथम चित्त को स्थिर करना आवश्यक है तभी इस चित्त में बीज रूप में संग्रहीत पिछले जन्मों का ज्ञान हो सकेगा। चित्त में स्थित संस्कारों पर संयम करने से ही पूर्व जन्म का ज्ञान होता है। चित्त को स्थिर करने के लिए सतत ध्यान क्रिया करना जरूरी है। 
 
ध्यान को जारी रखते हुए आप जब भी बिस्तर पर सोने जाएं, तब आंखें बंद करके उल्टे क्रम में अपनी दिनचर्या के घटनाक्रम को याद करें। जैसे सोने से पूर्व आप क्या कर रहे थे? फिर उससे पूर्व क्या कर रहे थे? तब इस तरह की स्मृतियों को सुबह उठने तक ले जाएं।
 
दिनचर्या का क्रम सतत जारी रखते हुए 'मेमोरी रिवर्स' को बढ़ाते जाएं। ध्यान के साथ इस जाति स्मरण का अभ्यास जारी रखने से कुछ माह बाद जहां मेमोरी पॉवर बढ़ेगा, वहीं नए-नए अनुभवों के साथ पिछले जन्म को जानने का द्वार भी खुलने लगेगा।
 
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