आस्था का अंधा ज्वार
शक्ति पूजा में भक्तों ने काटी जीभ, देवी को चढ़ाया रक्त
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सबसे पहले हमने रुख किया इंदौर के एक दुर्गा मंदिर का। कहा जाता है कि यहाँ के पुजारी को दुर्गाजी की सवारी आती है। जब हम वहाँ गए तो वहाँ का मंजर देखकर चौंक गए। वहाँ कई लोग अजीब तरह से झूम रहे थे। वहाँ के मुख्य पुजारी जलता कपूर अपने मुख में रखकर तलवार हाथ में लिए भक्तों के बीच कूद रहे थे। यहाँ आए श्रद्धालु उन्हें देवीस्वरूप मान उनकी पूजा कर रहे थे। साथ ही साथ कई अन्य भक्त भी पागलों की तरह झूम रहे थे। इनमें से कुछ लोग बड़े व्यवसायी यहाँ तक कि सरकारी मुलाजिम भी थे। वहीं भक्तों की तादाद में भी हर वर्ग के लोग शामिल थे।
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यहाँ से निकलकर हमने रुख किया धार रोड पर बने कुछ गाँवों का। गाँव के पास बने तालाब में लोगों की शक्ति पूजा देख कोई भी डर जाए। कुछ महिलाएँ भावुक हो अपनी जीभ पर तलवार फिरा रही थीं। लोग तरह-तरह से अपने जिस्म को तकलीफें दे रहे थे।
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यहाँ जीभ चढ़ा रहे मनोहर स्वरूप के भाई ने हमें बताया कि शादी के बारह साल बाद भी मनोहर के घर किलकारी नहीं गूँजी। मनोहर ने आंत्री माँ के दर पर मन्नत माँगी थी कि यदि उसकी पत्नी की गोद भर जाए तो वह यहाँ अपनी जीभ चढ़ाएगा। माँ ने मनोहर की मनोकामना पूरी कर दी, इसलिए वो यहाँ जीभ चढ़ाने आया है।
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