वैवाहिक जीवन की सफलता
- श्रीति राशिनकर
उस दिन श्री एवं श्रीमती जोशी (जिन्हें हम आदर से काका एवं काकू कहते हैं) के विवाह की 50 वीं सालगिरह में जाने का अवसर मिला। समारोह का आयोजन उनके दोनों बेटों व बहुओं ने मिलकर किया था।
अक्सर हम सभी ऐसे आयोजनों में जाते रहते हैं जिनमें पार्टी, खाना आदि होता है। लेकिन इस समारोह की विशेषता यह थी कि काका ने अपने उन मित्रों एवं उनकी पत्नियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया था जिन्होंने अपने विवाह के सफलतम पचास वर्ष पूर्ण किए थे। यह एक आत्मीय आयोजन था, जिसमें काका के बेटों ने उन सभी दंपतियों को मंच पर बिठाया जो सही मायने में वैवाहिक जीवन का आनंद ले रहे थे।
सभी को उपहारस्वरूप समई (दीपक) भेंट किए गए जिसमें लिखा हुआ था कि इसी तरह आपका वैवाहिक जीवन निर्बाध रूप से चलता रहे एवं भविष्य में रोशनी हो। सम्मान के बाद सभी से सफल वैवाहिक जीवन के बारे में विचार व्यक्त करने को कहा गया।
तब यकीन मानिए ये शब्द किसी ने नहीं कहे कि हम तो आज तक कभी झगड़े ही नहीं। सभी ने स्वीकार किया कि जीवन में छोटी-छोटी नोकझोंक तो होती ही रहती है लेकिन कोशिश यही होनी चाहिए कि यह झगड़े का बड़ा स्वरूप न ले।
सभी ने यह माना कि विवाह जैसे पवित्र बंधन को टिकाए रखने के लिए जरूरी है आपस में विश्वास और प्रेम का होना। समर्पण की भावना अगर है तो ही जीवन सफल हो सकता है।
जीवन में ऐसे अनेक क्षण आते हैं जब धैर्य एवं समर्पण दोनों ही जरूरी होते हैं। एक-दूसरे को समझना अत्यावश्यक है। जिससे कभी गलतफहमियों को जगह नहीं मिलती है। मान लें कभी मनमुटाव हो भी जाए तो आपस में विचार करके समस्या सुलझाई जा सकती है।
सभी के विचार सुनने के बाद जोशी दंपति ने बड़े ही उत्साहित स्वर में कहा- विवाह पति-पत्नी के हाथों के बंधन से होता है, लेकिन वैवाहिक जीवन तब सफल कहा जा सकता है जब मन मिलते हों।
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अक्सर हम सभी ऐसे आयोजनों में जाते रहते हैं जिनमें पार्टी, खाना आदि होता है। लेकिन इस समारोह की विशेषता यह थी कि काका ने अपने उन मित्रों एवं उनकी पत्नियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया था जिन्होंने अपने विवाह के सफलतम पचास वर्ष पूर्ण किए थे। यह एक आत्मीय आयोजन था, जिसमें काका के बेटों ने उन सभी दंपतियों को मंच पर बिठाया जो सही मायने में वैवाहिक जीवन का आनंद ले रहे थे।
सभी को उपहारस्वरूप समई (दीपक) भेंट किए गए जिसमें लिखा हुआ था कि इसी तरह आपका वैवाहिक जीवन निर्बाध रूप से चलता रहे एवं भविष्य में रोशनी हो। सम्मान के बाद सभी से सफल वैवाहिक जीवन के बारे में विचार व्यक्त करने को कहा गया।
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सभी ने यह माना कि विवाह जैसे पवित्र बंधन को टिकाए रखने के लिए जरूरी है आपस में विश्वास और प्रेम का होना। समर्पण की भावना अगर है तो ही जीवन सफल हो सकता है।
जीवन में ऐसे अनेक क्षण आते हैं जब धैर्य एवं समर्पण दोनों ही जरूरी होते हैं। एक-दूसरे को समझना अत्यावश्यक है। जिससे कभी गलतफहमियों को जगह नहीं मिलती है। मान लें कभी मनमुटाव हो भी जाए तो आपस में विचार करके समस्या सुलझाई जा सकती है।
सभी के विचार सुनने के बाद जोशी दंपति ने बड़े ही उत्साहित स्वर में कहा- विवाह पति-पत्नी के हाथों के बंधन से होता है, लेकिन वैवाहिक जीवन तब सफल कहा जा सकता है जब मन मिलते हों।
