You Have to Change | अब तुम्हें बदलना होगा
काश तुम मुझे समझ पाते
विवाह के बंधन में बँधने के बाद स्त्री-पुरूष दोनों पति-पत्नी के रूप में एक-दूसरे के जीवनसाथी बन जाते हैं। विवाह के बाद नवजीवन में प्रवेश कर वे दोनों प्रेम और विश्वास के तिनकों से अपनी गृहस्थी का आशियाना बुनते हैं।
कुछ साल तक तो नवविवाह के जोश में मुस्कुराते हुए इस तरह बीत जाते हैं कि दोनों को इसका आभास तक नहीं होता है लेकिन वैवाहिक जीवन के मध्यांतर के आते-आते अर्थात 8-10 सालों बाद जैसे-जैसे दोनों का सचाई से सामना होने लगता है वैसे-वैसे उन्हें अपने पर जी जान लुटाने वाला अपना जीवनसाथी ही अपना विरोधी नजर आने लगता है।
कब तक चलेगा ये बचपना :
मैं यह नहीं कहती कि ऐसा सभी के साथ होता है। ऐसा केवल उन दंपतियों के साथ होता है, जो उम्र में बड़े होकर भी दिमाग से बौने रहते हैं, जिनमें मैच्योरिटी नाम की कोई चीज नहीं होती है शायद इसीलिए वे माता-पिता बनकर भी बुद्धि से बचपने के दौर में ही गुजर रहे होते हैं। वही जिद, वही अकड़, वही बच्चों सी आदतें और वही रूठना जैसे उनकी प्रवृत्ति में घुल-मिल सा जाता है और बड़े होकर भी वे बच्चे ही बने रहते हैं।
ऐसी स्थिति में दांपत्य की गाड़ी के पहिये विरोधों के अवरोधों से बार-बार रूक से जाते हैं और यह गाड़ी तभी आगे बढ़ती है जब पति या पत्नी दोनों में से कोई एक सामंजस्य की पहल कर अपनी जिंदगी से समझौता कर लेता है। लेकिन ये समझौता कब तक... ?
आखिर आपको एक-दूसरे के साथ पूरी जिंदगी जीना है न कि इस रिश्ते को बोझ समझकर ढोना है तो क्यों न गृहस्थी के आशियाने को प्रेम के मुलायम तिनकों से आबाद किया जाए व इस रिश्ते में मोहब्बत का रंग भरा जाएँ।
अब मैं क्या कहूँ :
पति-पत्नी के रिश्ते में हर चीज बोलकर बताई नहीं जाती। यह तो आपसी समझ होनी चाहिए कि आपके लाइफ पार्टनर को किस वक्त किस चीज की जरूरत है। यदि कभी पति या पत्नी दोनों में से कोई एक, दूसरे के बिना बताए उसकी ख्वाहिश को जान जाएँ तथा उसे पूरा कर दे तो इससे बड़ा सरप्राइज उनके लिए कुछ और नहीं होगा। समझदार दंपति को चाहिए कि वे अपने बीच आपसी समझ को विकसित करें तथा कम से कम उम्र के इस पड़ाव पर आने के बाद बचपना छोड़ गंभीर हो जाएँ।
हमेशा खुश रहने के लिए आपको स्वयं को बदलना होगा क्योंकि जवानी तो जैसे-तैसे कट जाती है परंतु उम्र के उस पड़ाव में, जिसे बुढ़ापा कहते हैं। उस पड़ाव पर एक वफादार जीवनसाथी की कमी बहुत खलती है। यदि आप चाहते हैं कि आप जिंदगी में खुशियों को टटोलने की बजाय कुछ ऐसा करें कि खुशियाँ आपकी अनुगामिनी हो जाएँ तो इसके लिए आपको बदलना होगा।
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कुछ साल तक तो नवविवाह के जोश में मुस्कुराते हुए इस तरह बीत जाते हैं कि दोनों को इसका आभास तक नहीं होता है लेकिन वैवाहिक जीवन के मध्यांतर के आते-आते अर्थात 8-10 सालों बाद जैसे-जैसे दोनों का सचाई से सामना होने लगता है वैसे-वैसे उन्हें अपने पर जी जान लुटाने वाला अपना जीवनसाथी ही अपना विरोधी नजर आने लगता है।
कब तक चलेगा ये बचपना :
मैं यह नहीं कहती कि ऐसा सभी के साथ होता है। ऐसा केवल उन दंपतियों के साथ होता है, जो उम्र में बड़े होकर भी दिमाग से बौने रहते हैं, जिनमें मैच्योरिटी नाम की कोई चीज नहीं होती है शायद इसीलिए वे माता-पिता बनकर भी बुद्धि से बचपने के दौर में ही गुजर रहे होते हैं। वही जिद, वही अकड़, वही बच्चों सी आदतें और वही रूठना जैसे उनकी प्रवृत्ति में घुल-मिल सा जाता है और बड़े होकर भी वे बच्चे ही बने रहते हैं।
ऐसी स्थिति में दांपत्य की गाड़ी के पहिये विरोधों के अवरोधों से बार-बार रूक से जाते हैं और यह गाड़ी तभी आगे बढ़ती है जब पति या पत्नी दोनों में से कोई एक सामंजस्य की पहल कर अपनी जिंदगी से समझौता कर लेता है। लेकिन ये समझौता कब तक... ?
आखिर आपको एक-दूसरे के साथ पूरी जिंदगी जीना है न कि इस रिश्ते को बोझ समझकर ढोना है तो क्यों न गृहस्थी के आशियाने को प्रेम के मुलायम तिनकों से आबाद किया जाए व इस रिश्ते में मोहब्बत का रंग भरा जाएँ।
अब मैं क्या कहूँ :
पति-पत्नी के रिश्ते में हर चीज बोलकर बताई नहीं जाती। यह तो आपसी समझ होनी चाहिए कि आपके लाइफ पार्टनर को किस वक्त किस चीज की जरूरत है। यदि कभी पति या पत्नी दोनों में से कोई एक, दूसरे के बिना बताए उसकी ख्वाहिश को जान जाएँ तथा उसे पूरा कर दे तो इससे बड़ा सरप्राइज उनके लिए कुछ और नहीं होगा। समझदार दंपति को चाहिए कि वे अपने बीच आपसी समझ को विकसित करें तथा कम से कम उम्र के इस पड़ाव पर आने के बाद बचपना छोड़ गंभीर हो जाएँ।
हमेशा खुश रहने के लिए आपको स्वयं को बदलना होगा क्योंकि जवानी तो जैसे-तैसे कट जाती है परंतु उम्र के उस पड़ाव में, जिसे बुढ़ापा कहते हैं। उस पड़ाव पर एक वफादार जीवनसाथी की कमी बहुत खलती है। यदि आप चाहते हैं कि आप जिंदगी में खुशियों को टटोलने की बजाय कुछ ऐसा करें कि खुशियाँ आपकी अनुगामिनी हो जाएँ तो इसके लिए आपको बदलना होगा।
