सावन के आगमन के साथ ही कावड़ मेला भी शुरू, सुरक्षा की रहेगी कड़ी व्यवस्था

Last Updated: बुधवार, 17 जुलाई 2019 (22:01 IST)
देहरादून। के महीने के आगमन के साथ ही बुधवार से एक पखवाड़े तक चलने वाला कावड़ मेला भी शुरू हो गया। इस दौरान कावड़िए हरिद्वार तथा आसपास के क्षेत्रों से पवित्र गंगा जल लेकर उसे अपने घर तथा गांवों के शिवालयों में अर्पित करेंगे।
बुधवार को पहले ही दिन दर्जनों कावड़िए हरिद्वार पहुंचे और उत्तराखंड पुलिस को उम्मीद है कि इस साल कम से कम 3 करोड़ कावड़िए प्रदेश का रुख करेंगे।

केसरिया वस्त्र पहने और कंधों पर कावड़ उठाए कावड़िए हरिद्वार के मुख्य स्नान घाट हर की पौड़ी तथा अन्य घाटों पर समूहों और टोलियों में सुबह से ही पहुंचने लगे हैं। ये कावड़िए उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र तथा बिहार जैसे राज्यों से लंबी दूरी तय कर यहां पहुंच रहे हैं।
उत्तराखंड पुलिस को उम्मीद है कि इस बार कम से कम 3 करोड़ कावड़िए हरिद्वार तथा आसपास के क्षेत्रों से गंगा जल भरने के लिए पहुंचेंगे। कावड़ियों के आगमन में तेजी मेले के आखिरी सप्ताह में आएगी और उस समय हरिद्वार, ऋषिकेश तथा आसपास का पूरा इलाका केसरिया हो जाता है।

मुख्यमंत्री ने भी कावड़ियों का उत्तराखंड में स्वागत करते हुए उनकी सुरक्षित और सफल यात्रा की कामना की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कावड़ियों के लिए पेयजल समेत सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कावड़ियों को अपनी यात्रा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी नहीं आनी चाहिए।
प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) अशोक कुमार ने बताया कि कावड़ियों द्वारा प्रयुक्त किए जाने वाले मार्गों पर करीब 10 हजार पुलिस और अर्द्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं। इसके अलावा बम निरोधी तथा आतंकवादी निरोधी दस्ते की भी तैनाती की गई है।

उन्होंने बताया कि मेला क्षेत्र में चयनित स्थानों पर कड़ी निगाह रखने के लिए सीसीटीवी तथा ड्रोन कैमरे भी लगाए गए हैं। कुमार ने बताया कि संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए मेले के दौरान संवेदनशील स्थानों पर सादे कपड़ों में भी पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे।
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हरिद्वार को 12 सुपर जोन, 31 जोन और 133 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। कुमार ने बताया कि अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कावड़ियों को व्यवस्थाओं तथा मार्गों के बारे में जानकारी देने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का भरपूर उपयोग किया जाए।



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