Galgotias Robodog विवाद के सोशल मीडिया की रडार पर आईं प्रोफेसर नेहा सिंह, डिलीट किया LinkedIn प्रोफाइल
भारत मंडपम में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में चीन निर्मित रोबोटिक डॉग (Robodog) को अपना बताने के विवाद में घिरीं गलगोटिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह ने अपना लिंक्डइन (LinkedIn) प्रोफाइल डिलीट कर दिया है। यह कदम तब उठाया गया है जब यूनिवर्सिटी और प्रोफेसर को सोशल मीडिया पर भारी ट्रोलिंग और 'झूठे इनोवेशन' के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है।
विवाद बढ़ने के बाद नेहा सिंह ने खेद जताते हुए मीडिया से कहा था कि उनकी बातों का गलत मतलब निकाला गया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि मैं और अधिक स्पष्ट तरीके से अपनी बात रख सकती थी। समिट के उत्साह और जल्दबाजी में चीजें थोड़ी इधर-उधर हो गईं। गलत दावा करने का मेरा कोई इरादा नहीं था।
प्रोफाइल पर दिखा 404 एरर
मीडिया खबरों के मुताबिक प्रोफेसर नेहा सिंह के लिंक्डइन अकाउंट का लिंक अब 'Page doesnt exist' दिखा रहा है। इंटरनेट की भाषा में इसे '404 एरर' कोड कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि कंटेंट को हटा दिया गया है। गौरतलब है कि इससे पहले यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया था कि प्रोफेसर को सस्पेंड नहीं किया गया है, लेकिन मामले की जांच जारी है।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
समिट के दौरान प्रोफेसर नेहा का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने एक रोबोटिक कुत्ते का परिचय 'Orion' के रूप में कराया था। वीडियो में उन्हें यह कहते सुना गया कि यह ओरियन है। इसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में डेवलप किया गया है। उन्होंने दावा किया था कि यह रोबोट निगरानी और मॉनिटरिंग के काम कर सकता है।
हालांकि, नेटिजन्स (इंटरनेट यूजर्स) ने तुरंत पहचान लिया कि यह 'ओरियन' कोई यूनिवर्सिटी का आविष्कार नहीं, बल्कि चीनी कंपनी 'Unitree Robotics' द्वारा व्यावसायिक रूप से बेचा जाने वाला रोबोट है। इसके बाद विवाद इतना बढ़ गया कि आयोजकों ने इसे "राष्ट्रीय शर्मिंदगी" बताते हुए यूनिवर्सिटी को स्टॉल खाली करने का आदेश दे दिया।
यूनिवर्सिटी ने प्रोफेसर पर ही फोड़ा ठीकरा
यूनिवर्सिटी ने इस 'गलतफहमी' के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी और अपनी सफाई में कहा है कि वे ऐसे दिमाग (छात्र) तैयार कर रहे हैं जो भविष्य में भारत में ऐसी तकनीक बनाएंगे, न कि उन्होंने इसे फिलहाल बनाया है। गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने खुद को बचाने के लिए तीन अलग-अलग बयान जारी किए और सारा दोष प्रोफेसर नेहा सिंह पर मढ़ दिया था।
यूनिवर्सिटी ने कहा था कि यूनिवर्सिटी ने कभी इस प्रॉडक्ट को अपना होने का दावा नहीं किया। यह यूनिट्री से खरीदा गया था। यूनिवर्सिटी की प्रतिनिधि नेहा सिंह कम जानकारी वाली थीं। कैमरे पर आने के उत्साह में उन्होंने गलत तथ्य पेश किए, जबकि उन्हें प्रेस से बात करने का अधिकार ही नहीं था। Edited by : Sudhir Sharma