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Last Updated :वॉशिंगटन , शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026 (22:56 IST)

डोनाल्ड ट्रंप को US Supreme Court का बड़ा झटका, टैरिफ को बताया गैरकानूनी, भारत पर क्या पड़ेगा सीधा असर?

Donald Trump
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सबसे आक्रामक आर्थिक नीतियों में से एक को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। कोर्ट ने ट्रंप द्वारा 'नेशनल इमरजेंसी' (राष्ट्रीय आपातकाल) कानून के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ (आयात शुल्क) को रद्द कर दिया है।  इस फैसले का वैश्विक व्यापार युद्ध (Trade War) और भारत जैसे देशों पर बड़ा असर पड़ेगा। 

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आईईईपीए (IEEPA) का उपयोग कर लगाए गए टैरिफ (सीमा शुल्क) को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से यह फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति की शक्तियों की व्याख्या की।
 

क्या है IEEPA?

'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (IEEPA) राष्ट्रपति को अंतरराष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में व्यापार को नियंत्रित करने की शक्ति देता है, लेकिन कोर्ट के इस ताजा फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि इसका उपयोग मनमाने ढंग से टैरिफ लगाने के लिए नहीं किया जा सकता। बहुमत का फैसला लिखते हुए चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने राष्ट्रपति की शक्तियों पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अपने ओपिनियन में लिखा कि सरकार IEEPA की व्याख्या इस तरह कर रही है जैसे राष्ट्रपति के पास एकतरफा रूप से असीमित टैरिफ लगाने और उन्हें अपनी मर्जी से बदलने की शक्ति हो।
यह नजरिया टैरिफ नीति पर राष्ट्रपति के अधिकार का एक ऐसा विस्तार होगा जो पूरी व्यवस्था को बदलकर रख देगा। रॉबर्ट्स ने आगे जोर देते हुए कहा कि आईईईपीए के आधे दशक के अस्तित्व में आज तक किसी भी राष्ट्रपति ने इतने बड़े स्तर पर टैरिफ लगाने के लिए इस कानून का सहारा नहीं लिया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक मिसाल की कमी और राष्ट्रपति द्वारा किए जा रहे बड़े अधिकारों के दावे यह बताते हैं कि ये टैरिफ ट्रंप के अधिकार क्षेत्र से बाहर थे।

तीन जजों ने जताया विरोध  

इस फैसले में तीन जजों जस्टिस क्लेरेंस थॉमस, सैमुअल अलिटो और ब्रेट कवानुघ ने असहमति जताई।  बहुमत के खिलाफ लिखते हुए जस्टिस क्लेरेंस थॉमस ने कहा कि न तो कानून के शब्द और न ही संविधान, राष्ट्रपति के खिलाफ फैसला सुनाने का कोई आधार प्रदान करते हैं। अदालत ने लंबे समय से कांग्रेस को यह संदेश दिया है कि वह अन्य देशों के साथ व्यापार और वाणिज्य से संबंधित कानूनों के निष्पादन के मामलों में राष्ट्रपति को व्यापक विवेक और शक्तियां दे सकती है। 

175 अरब डॉलर वापस करने की नौबत

मीडिया खबरों के मुताबिक IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ से अब तक 175 अरब डॉलर (करीब 14.5 लाख करोड़ रुपए) से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। कोर्ट द्वारा इन शुल्कों को अवैध घोषित किए जाने के बाद, ट्रंप प्रशासन को यह भारी-भरकम राशि रिफंड (वापस) करनी पड़ सकती है।

भारत पर पड़ेगा सीधा असर

ट्रंप ने पद संभालते ही 2 अप्रैल को 'लिबरेशन डे' के रूप में मनाते हुए भारत सहित कई देशों पर 'रेसिप्रोकल टैरिफ' लगाए थे। उन्होंने भारत के साथ व्यापार घाटे को 'राष्ट्रीय आपातकाल' करार दिया था।  ट्रंप ने हार्ले-डेविडसन मोटरसाइकिल, कृषि उत्पादों और मेडिकल डिवाइस पर भारत के टैक्स ढांचे की बार-बार आलोचना की थी।
 भारत द्वारा रूस से सस्ता तेल खरीदने पर भी ट्रंप ने टैरिफ को 'हथियार' के तौर पर इस्तेमाल करने के संकेत दिए थे।  भारत और अमेरिका के बीच सालाना 190 अरब डॉलर से ज्यादा का व्यापार होता है। इस फैसले से फार्मा, टेक्सटाइल और आईटी सेक्टर के भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिल सकती है। Edited by : Sudhir Sharma