सांझी पर्व के गीत
गीतों के माध्यम से सांझी पर्व
संझा बाई को छेड़ते हुए लड़कियां गाती हैं-संझा बाई का लाड़ाजी, लूगड़ो लाया जाड़ाजीअसो कई लाया दारिका, लाता गोट किनारी का।संझा तू थारा घर जा कि थारी मांमारेगी कि कूटेगीचांद गयो गुजरात हरणी का बड़ा-बड़ा दांत,कि छोरा-छोरी डरपेगा भई डरपेगा।म्हारा अंगना में मेंदी को झाड़,दो-दो पत्ती चुनती थीगाय को खिलाती थी, गाय ने दिया दूध,दूध की बनाई खीरखीर खिलाई संझा को, संझा ने दिया भाई,भाई की हुई सगाई, सगाई से आई भाभी,भाभी को हुई लड़की, लड़की ने मांडी संझासंझा सहेली बाजार में खेले, बाजार में रमेवा किसकी बेटी व खाय-खाजा रोटी वापेरे माणक मोती,ठकराणी चाल चाले, मराठी बोली बोले,संझा हेड़ो, संझा ना माथे बेड़ो।