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भारतीय मूल के लेखक ने जीता दक्षिण-पूर्व एशिया का साहित्यिक पुरस्कार

southeast asia rights award
सिंगापुर। इस साल के प्रतिष्ठित ‘साउथ-ईस्ट एशिया राइट अवॉर्ड’ के लिए भारतीय मूल के 76 वर्षीय  लेखक जमालुद्दीन मोहम्मद शाली के नाम की घोषणा की गई। लेखक की 57 किताबें विश्वविद्यालयों में  पढ़ाई जाती हैं।

मीडिया में शनिवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक 50 साल से अधिक समय से लेखन कर रहे जमालुद्दीन  मोहम्मद शाली सोमवार को पुरस्कार ग्रहण करेंगे। उन्हें सिंगापुर के प्रतिष्ठित ‘कल्चरल मेडैलियन’ और  तमिलनाडु से मिले कई पुरस्कार समेत कई साहित्यिक पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।
 
'जेएम शाली' के नाम से विख्यात लेखक ने 57 किताबें, 80 नाटक और 400 से भी अधिक लघुकथाएं  लिखी हैं। उनकी किताबों में वेल्लई कोडुगल (सफेद रेखा) अलैगल पेसुगिनराना (हवाओं की आवाज) जैसी  रचनाएं शामिल हैं जिनका अध्ययन सिंगापुर और भारत के विश्वविद्यालयों में तमिल साहित्य के छात्र  करते हैं।
 
शाली ने ‘स्ट्रेट टाइम्स’ को बताया कि इस पुरस्कार को मैं खुद के लिए नहीं बल्कि यह सिंगापुर के लोगों  मानता हूं। मुझे उम्मीद है कि हम लोग साहित्यिक प्रतिभाओं को पुरस्कार देना जारी रखेंगे और यहां  अपनी मातृभाषा में लेखन के लिए प्रेरित करते रहेंगे।
 
मद्रास में 1939 में जन्मे लेखक यहां अपनी पत्नी और 28 वर्षीय बेटे के साथ रहते हैं। उन्होंने कहा कि  अभी भी मुझे भारत की पत्रिकाओं से लेख लिखने का प्रस्ताव आता रहता है इसलिए जब तक वे मुझसे  लिखने के लिए कहते रहेंगे, मैं लिखना जारी रखूंगा।
 
शाली को अगले सोमवार को बैंकॉक में साहित्यिक उत्कृष्टता के लिए वार्षिक ‘एशियन क्षेत्रीय पुरस्कार’ से  सम्मानित किया जाएगा। 2000 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने लेखन और अनुवाद का काम निरंतर  जारी रखा।
 
वर्ष 1979 में शुरू हुए ‘साउथ-ईस्ट एशिया राइट अवॉर्ड’ या ‘साउथ ईस्ट एशियन राइट अवॉर्ड’ में दक्षिण  एशिया के कवि और लेखकों को सालाना पुरस्कृत किया जाता है। यह पुरस्कार दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र  संघ का हिस्सा रहे देशों के लेखकों को दिया जाता है। (भाषा)