हनीफ पर लगाए थे गलत आरोप
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इस मामले में आज जारी आधिकारिक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। ऑस्ट्रेलिया के अटॉर्नी जनरल राबर्ट मैकलैंड ने संवाददाताओं के साथ बातचीत में कहा- इस मामले में निचले स्तर से उच्च स्तर तक गलती हुई।
एक व्यक्ति पर गलत आरोप लगाए गए और उसे जरूरत से अधिक समय तक बेवजह हिरासत में रखा गया। यह स्थिति स्वीकार्य नहीं है और इस तरह की घटना नहीं होनी चाहिए थी। उत्तर क्वींसलैंड में एक अस्पताल में काम करने वाले डॉक्टर हनीफ पर आतंकवादी संगठन को सहायता देने का आरोप लगाया गया था।
ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने इससे पहले उसे 11 दिन तक बिना कोई आरोप दायर किए हिरासत में रखा था। पुलिस का कहना था कि डॉक्टर हनीफ का नम्बर बम विस्फोट के दोषी लोगों में से एक के मोबाइल सिम कार्ड में मिला था। बाद में जाँच के बाद ये आरोप वापस ले लिए गए और डॉक्टर हनीफ को भारत में उसके परिवार से मिलने की अनुमति दी गई थी।
ऑस्ट्रेलिया की नई लेबर सरकार द्वारा डॉक्टर हनीफ की गिरफ्तारी के मामले की न्यायिक जाँच के लिए गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उसे इन हमलों के बारे में किसी तरह की जानकारी नहीं थी और उस पर आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑस्ट्रेलिया के खुफिया संगठन ने उस समय की कंजरवेटिव सरकार से कई बार कहा था कि डॉक्टर हनीफ के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। पुलिस ने भी सरकार को यही बात कही थी लेकिन बाद में उसने अपनी स्थिति बदलते हुए एक अभियोजक की आरोप तय करने की बात का समर्थन किया।
हालाँकि न्यायिक जाँच में पूर्व प्रधानमंत्री जॉन हावर्ड की सरकार को इस मामले में यह कहते हुए क्लिन चिट दी गई है कि डॉक्टर हनीफ की गिरफ्तारी राजनीति से प्रेरित नहीं थी। रिपोर्टमें कहा गया है कि सरकार खुफिया संगठन और पुलिस के अलग-अलग आकलनों का ठीक से विश्लेषण नहीं कर पाई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार की ओर से मामले में स्थिति को स्पष्ट करने के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए गए। अभी संयुक्त अरब अमीरात में रह रहे डॉक्टर हनीफ ने कहा है कि उनका परिवार अभी भी उस हादसे से नहीं उबर पाया है। हालाँकि उन्होंने कहा कि वह अभी भी उस देश में लौटने को तैयार है।
