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Last Updated :काठमांडू , शुक्रवार, 12 सितम्बर 2025 (22:05 IST)

नेपाल में अंतरिम सरकार की प्रमुख बनीं सुशीला कार्की, भारत के साथ गहरे होंगे रिश्ते

एक इंटरव्यू में कार्की ने कहा था, मेरे मन में नरेन्द्र मोदी के प्रति अच्छी छवि

Sushila Karki took oath in Nepal
Sushila Karki took oath in Nepal: करीब 50 साल पहले जब सुशीला कार्की ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की थी, तो शायद उन्होंने यह नहीं सोचा होगा कि वह नेपाल की राजनीति में एक कीर्तिमान स्थापित करेंगी। कार्की ने नेपाल की अंतरिम सरकार की मुखिया के तौर पर शपथ ले ली है। उन्होंने हाल ही में नरेन्द्र मोदी की भी तारीफ की थी। जा‍हिर है नेपाल और भारत के रिश्तें पहले से ज्यादा अच्छे होंगे। क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का झुकाव चीन की ओर था। 
 
नेपाल के उच्चतम न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश कार्की (73) अब नेपाल की अंतरिम सरकार की मुखिया बन गई हैं। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल, सेना प्रमुख अशोक राज सिगडेल समेत नेपाल के शीर्ष सैन्य अधिकारियों और ‘जेन-जेड’ के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक के बाद कार्की को अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए चुना गया। ALSO READ: नेपाल का ‘डिजिटल विद्रोह’: GenZ की क्रांति बनी भारतीय विदेश नीति की सबसे बड़ी चुनौती, अब आगे क्‍या होगा?
 
जुलाई 2016 में कार्की को नेपाल का 24वां मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था और वह इस पद पर आसीन होने वाली पहली और अब तक की एकमात्र महिला बनीं। कार्की लगभग 11 महीने तक इस पद पर रहीं। वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश त्रिपाठी ने कहा कि उन्होंने भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता वाली एक साहसी और निष्पक्ष न्याय की वकालत करने वाली महिला की छवि बनाई है। एक साहसी और दृढ़निश्चयी न्यायाधीश के रूप में, वह भ्रष्टाचार के विरुद्ध मजबूती से खड़ी रही हैं।
 
महाभियोग प्रस्ताव का सामना : कार्की को तत्कालीन प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउबा सरकार द्वारा पेश किए गए महाभियोग प्रस्ताव का भी सामना करना पड़ा था, लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया गया था। कई पक्षों ने इस प्रस्ताव को राजनीतिक रूप से पक्षपातपूर्ण माना था। कार्की का जन्म सात जून 1952 को पूर्वी नेपाल के विराटनगर के शंकरपुर-3 में हुआ था, जो भारतीय सीमा के निकट है। ALSO READ: Nepal Gen Z Protest: नेपाल की बर्बादी का क्या है जगन्नाथ मंदिर से कनेक्शन?
 
उन्होंने 1971 में महेंद्र मोरंग परिसर-त्रिभुवन विश्वविद्यालय, नेपाल से स्नातक की डिग्री और 1975 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री पूरी की। इसके बाद उन्होंने 1978 में त्रिभुवन विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की। कार्की ने न्यायिक पेशे में 32 साल बिताए और न्यायपालिका के क्षेत्र में महिलाओं की प्रगति का प्रतीक बन गईं। उन्होंने 1979 में विराटनगर में अपनी वकालत शुरू की, जहां उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके कानूनी करियर को आकार दिया।
 
इस बीच, 1985 में उन्हें महेंद्र मल्टीपल कैंपस, धरान में सहायक शिक्षक के रूप में भी नियुक्त किया गया। कार्की 2007 में वरिष्ठ अधिवक्ता बनीं और 2009 में उन्हें उच्चतम न्यायालय में तदर्थ न्यायाधीश नियुक्त किया गया। 18 नवंबर 2010 को वह स्थायी न्यायाधीश बनीं। कार्की अपने माता-पिता की सात संतानों में सबसे बड़ी हैं और विराटनगर के एक साधारण किसान परिवार में पली-बढ़ीं। उनका विवाह नेपाली कांग्रेस के पूर्व लोकप्रिय नेता दुर्गा प्रसाद सुबेदी से हुआ है। दोनों की मुलाकात बीएचयू में पढ़ाई के दौरान हुई थी।
 
भारत और नेपाल के गहरे रिश्ते : कार्की ने हाल ही में एक इंटरव्यू में भारत को लेकर सकारात्मक बातें कहीं। उन्होंने कहा कि मेरे मन में मोदी जी के प्रति अच्छी छवि है। उन्होंने भारत और नेपाल के लोगों के बीच गहरे रिश्ते को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत और नेपाल की जनता का रिश्ता सरकारों से परे है। दोनों देशों के बीच बहुत पुराना और मजबूत जुड़ाव है। हमारे कई रिश्तेदार और दोस्त भारत में हैं। कार्की ने यह भी जोड़ा कि भारत ने हमेशा नेपाल की मदद की है और भले ही कभी-कभार छोटी-मोटी खटपट हो, रिश्ता हमेशा मजबूत बना रहता है। 
 
उन्होंने प्रदर्शनकारियों के समर्थन को स्वीकार करते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता उन परिवारों को सम्मान और सहायता देना है, जिन्होंने हाल के आंदोलनों में अपने प्रियजनों को खोया। कार्की ने यह भी कहा कि नेपाल की राह चुनौतियों से भरी है, लेकिन वह देश के विकास और शांति के लिए काम करने को तैयार हैं।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala