Nepal Gen Z Protest: नेपाल की बर्बादी का क्या है जगन्नाथ मंदिर से कनेक्शन?
Nepal Gen Z Protest: सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है कि नेपाल में माओवादी विद्रोह और शाही नरसंहार जैसी घटनाओं के बाद, 2008 में राजशाही को खत्म कर दिया गया था। इसके बाद से नेपाल से जगन्नाथ मंदिर को भेजा जाने वाला कस्तूरी बंद हो गया। इसके बाद वर्ष 2015 में नेपाल में भयानक भूकंप आया जिसने पूरे नेपाल को हिलाकर रख दिया। जिसमें 6,00,000 से ज्यादा इमारतें ध्वस्त हो गई और करीब 9000 से ज्यादा लोग मारे गई थे। इसके बाद से ही नेपाल कभी संभल नहीं पाया। वहां निरंतर रूप से धर्म का अपमान किया जाता रहा जिसके चलते नई नई आपदाओं से नेपाल की जनता त्रस्त हो चली है।
नेपाल और जगन्नाथ पुरी का प्राचीन रिश्ता:
नेपाल के राजाओं और पुरी जगन्नाथ मंदिर के बीच सदियों पुराना आध्यात्मिक संबंध रहा है। नेपाली राजा सूर्यवंशी हैं, और पुरी के गजपति राजा चंद्रवंशी। दोनों को जगन्नाथ परंपरा जोड़ती है। पहले नेपाल के राजा नियमित रूप से कस्तूरी नामक सुगंधित पदार्थ पुरी मंदिर को भेजते थे, और उन्हें रत्न सिंहासन पर भगवान की पूजा करने का विशेष अधिकार प्राप्त था। परंतु 2008 में नेपाल में राजशाही खत्म होने के बाद, वन्यजीव संरक्षण कानूनों के कारण कस्तूरी की आपूर्ति बंद हो गई। इससे मंदिर के अनुष्ठान प्रभावित हुए हैं। हालांकि कई लोगों का मानना है कि यह फैसला सही था इससे नेपाल की तबाही का कोई संबंध नहीं है।
क्या जगन्नाथ मंदिर को कस्तूरी न देने से नेपाल में हो रही है तबाही?
ऐसा कहा जा रहा है कि नेपाल में हाल ही में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन, जिनमें प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा और कई लोगों की मौत हुई, के पीछे एक भगवान जगन्नाथ का अपमान है। चौंकाने वाले दावे के अनुसार ओडिशा के पुरी जगन्नाथ मंदिर के सेवक इस तबाही की वजह नेपाल द्वारा मंदिर को कस्तूरी की आपूर्ति बंद करना मान रहे हैं।
क्या है कस्तूरी का जगन्नाथ मंदिर से कनेक्शन?
कस्तूरी एक दुर्लभ पदार्थ है जो हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले कस्तूरी मृग की नाभि से प्राप्त होता है। यह पुरी के भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियों के लिए बहुत महत्व रखता है। इसे 'बनक लागी' नामक गुप्त अनुष्ठान में देवताओं के श्रृंगार के लिए उपयोग किया जाता है, जो मूर्तियों को कीड़ों से बचाने और उनकी चमक बनाए रखने में मदद करता है।
कस्तूरी नहीं भेजने का और नेपाल में तबाही से संबंध का दावा सही है क्या?
मंदिर के सेवकों का मानना है कि जब से नेपाल ने कस्तूरी भेजना बंद किया है, वहां कोई न कोई आपदा आई है। उनका कहना है कि पहले भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएं आईं और अब यह हिंसा। वे इसे नेपाल के जगन्नाथ मंदिर से आध्यात्मिक संबंध तोड़ने का परिणाम मानते हैं। सेवकों ने भारत सरकार और मंदिर प्रशासन से अपील की है कि वे कस्तूरी की आपूर्ति फिर से शुरू करने के लिए कदम उठाएं ताकि यह प्राचीन आध्यात्मिक बंधन बना रहे। हालांकि कई लोगों का मानना है कि यह सिर्फ एक अंधविश्वास है।