फ्रीड्रिश मेर्त्स 6 मई, 2025 से जर्मनी के 10वें चांसलर (प्रधानमंत्री) हैं। 11 जनवरी को भारत पहुंचने के साथ शुरू हुई उनकी 2 दिवसीय यात्रा, भारत की पहली यात्रा है। यह यात्रा दिल्ली नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात में अहमदाबाद से शुरू हुई। जर्मनी के चांसलर ने अपनी भारत यात्रा का शुभारंभ प्रधानमंत्री मंत्री मोदी के गृह राज्य गुजरात से करने के निमंत्रण को एक विशेष सम्मान बताया। मोदी की तरह गुजरात ही भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का भी जन्म स्थान है।
अपनी पहली आपसी बातचीत के बाद, अहमदाबाद में ही प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में जर्मन चांसलर ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जर्मनी और भारत के बीच नयी और गहन साझेदारी के लिए वर्तमान समय से बेहतर परिस्थितियां शायद ही हो सकती हैं। उन्होंने कहा, यूरोपीय संघ में सबसे अधिक आबादी वाला और आर्थिक रूप से सबसे शक्तिशाली देश जर्मनी और विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत मूलभूत मूल्यों से एकजुट हैं। अत्यधिक गतिशील भारत और तकनीकी रूप से अग्रणी जर्मनी के हित एक समान हैं। इस वर्ष के अंत में बर्लिन में दोनों देशों के बीच के भावी सरकारी परामर्श होंगे।
6 मई स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन भी था। इसे याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन से जुड़े चांसलर मेर्त्स का स्वागत करना मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता का विषय है। यह एक सुखद संयोग है कि स्वामी विवेकानंद ने ही भारत और जर्मनी के बीच एक दर्शन की स्थापना की और एक आध्यात्मिक सेतु का निर्माण किया। चांसलर की यह यात्रा दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों को और अधिक मज़बूत करेगी। यह उनकी भारत की न केवल पहली यात्रा है, बल्कि एशिया की भी उनकी पहली यात्रा है। यह भारत के साथ संबंधों को दिए जाने वाले उनके महत्व का स्पष्ट संकेत है। इसलिए मैं उनके व्यक्तिगत ध्यान और प्रतिबद्धता के लिए उन्हें धन्यवाद देता हूं।
मोदीजी का कहना था कि जर्मन चांसलर की यह यात्रा एक विशेष समय पर हो रही है। पिछले वर्ष हमने रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया था, और इस वर्ष हम दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। ये उपलब्धियां न केवल सफलताएं हैं, बल्कि हमारे साझा लक्ष्यों, आपसी विश्वास और बढ़ते एवं मजबूत होते सहयोग के प्रतीक भी हैं।
बढ़ते द्विपक्षीय व्यापार और पारस्परिक निवेश ने हमारी रणनीतिक साझेदारी को नई गति प्रदान की है। द्विपक्षीय व्यापार अपने चरम पर है और हमने 50 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया है। 2,000 से अधिक जर्मन कंपनियां लंबे समय से भारत में मौजूद हैं। यह भारत पर रखे गए अटूट विश्वास और इसके द्वारा प्रदत्त असीमित अवसरों का प्रमाण है।
कुछ और उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच तकनीकी सहयोग वर्षों से लगातार मजबूत होता जा रहा है- आज इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भारत और जर्मनी नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं। हमारी प्राथमिकताएं समान हैं। हमने इस क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए 'भारत-जर्मन उत्कृष्टता केंद्र' स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह ज्ञान के आदान-प्रदान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के लिए एक संयुक्त मंच होगा।
इसी प्रकार जलवायु परिवर्तन से निपटने, ऊर्जा, शहरी नियोजन और शहरी गतिशीलता जैसे क्षेत्रों में हम संयुक्त रूप से नई परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं। दोनों देशों की कंपनियों के बीच हरित हाइड्रोजन के क्षेत्र में शुरू की गई यह नई बड़ी परियोजना, एक मेगाप्रोजेक्ट है, जो भविष्य के ऊर्जा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। भारत और जर्मनी सुरक्षित और विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। आज ही हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन हमारे सहयोग को और मजबूत करेगा और नई गति प्रदान करेगा।
रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में बढ़ता सहयोग हमारे आपसी विश्वास को दर्शाता है और हमारे साझे दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है। औद्योगिक और रक्षा सहयोग के क्षेत्र में प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने में सहयोग के लिए मैं हार्दिक आभार व्यक्त करना चाहता हूं। हम अपने रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग को और गहरा करने के लिए एक रोडमैप पर काम कर रहे हैं। इससे संयुक्त उत्पादन और विकास के नए अवसर पैदा होंगे।
भारत की जनता को संबोधित करते हुए मोदीजी का कहना है कि भारत और जर्मनी के बीच व्यक्तिगत संबंध गहरे और मजबूत हुए हैं। हमने जर्मन इतिहास और साहित्य पर अपने विचार साझा किए हैं, और स्वतंत्रता संग्राम के समय की सुश्री भिकाजी कामा को भी याद किया, जिन्होंने (किसी विदेशी धरती पर पहली बार 22, अगस्त 1907 को एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समय) जर्मनी में अपना बनाया पहला भारतीय ध्वज फहराया था। उस समय तक भारत का अपना कोई राष्ट्रीय झंडा नहीं था। आज, हम इस ऐतिहासिक संबंध को एक आधुनिक साझेदारी में रूपांतरित कर रहे हैं।
भारत में बहुत सारे प्रतिभाशाली युवा हैं और वे जर्मन अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। हम इसे और बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाएंगे। वैश्विक कौशल साझेदारी के लिए 'संयुक्त आशय घोषणा' इस विश्वास का प्रतीक है। इससे स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कुशल पेशेवरों के विदेशी आप्रवासन में सुविधा होगी। हमने खेल के क्षेत्र में भी सहयोग करने पर सहमति व्यक्त की है। आज हमने उच्च शिक्षा के लिए जो व्यापक रोडमैप तैयार किया है, उससे शिक्षा के क्षेत्र में हमारी साझेदारी को नई गति मिलेगी।
मैं जर्मन विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर खोलने के लिए आमंत्रित करता हूं। मैं चांसलर मेर्त्स को भारतीय नागरिकों के लिए वीज़ा-मुक्त पारगमन की घोषणा के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। इससे भी दोनों देशों के लोगों को और करीब लाने में मदद मिलेगी। मुझे यह जानकर भी खुशी है कि जर्मन समुद्री संग्रहालय के सहयोग से गुजरात में एक भवन का निर्माण किया जाएगा। यह समुद्री इतिहास को दृश्यमान बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में, गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय जर्मनी के साथ घनिष्ठ संबंध और सहयोग बनाए हुए है। इस महत्वपूर्ण विषय पर हस्ताक्षरित समझौता इस क्षेत्र में हमारे सहयोग को और मजबूत करेगा।
हमारी मित्रता का प्रभाव वैश्विक मंच पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। घाना, कैमरून और मलावी जैसे देशों में संयुक्त परियोजनाएं वहां विकास के लिए हमारी त्रिपक्षीय सहयोग साझेदारी के सफल उदाहरण हैं। हम वैश्विक दक्षिण के विकास के लिए अपने संयुक्त प्रयासों को जारी रखेंगे। हिंद-प्रशांत क्षेत्र एक ऐसा क्षेत्र है, जिसे दोनों देश उच्च प्राथमिकता देते हैं। इस क्षेत्र में अपने समन्वय को मजबूत करने के लिए, हम एक परामर्श तंत्र स्थापित करेंगे।
मोदीजी का कहना है कि हमने यूक्रेन और गाजा सहित विभिन्न वैश्विक और क्षेत्रीय विषयों पर चर्चा की। भारत हमेशा सभी समस्याओं और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थक रहा है और आगे भी रहेगा। हम इस बात से सहमत हैं कि आतंकवाद पूरी मानवता के लिए एक गंभीर खतरा है। भारत और जर्मनी आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ाई जारी रखेंगे। भारत और जर्मनी इस बात पर सहमत हैं कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक संस्थानों में सुधार अत्यंत आवश्यक हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और जी4 में हमारे संयुक्त प्रयास इस साझा दृष्टिकोण का प्रमाण हैं।
जर्मन चांसलर का उत्तर
जर्मनी के चांसलर (प्रधानमंत्री) फ्रीड्रिश मेर्त्स का कहना है कि यह साल मेरे लिए सबसे पहले भारत की यात्रा से ही शुरू हो रहा है। चांसलर के रूप में दक्षिण-पूर्व एशिया की यह मेरी पहली यात्रा है। इस यात्रा के द्वारा मैं भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित करना चाहता हूं। भारत के साथ यह रणनीतिक साझेदारी जर्मनी के लिए और स्वयं मेरे लिए भी व्यक्तिगत रूप से सर्वोच्च प्राथमिकता है।
जैसा कि आपने (मोदीजी ने) पहले ही उल्लेख किया है, 75 वर्षों के राजनयिक संबंध हमें जोड़ते हैं। राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष बाद, यह पहले से कहीं अधिक सत्य है कि हमारे दोनों देश गहन, बल्कि और भी गहन सहयोग की तलाश में हैं। आज सुबह मुझे महात्मा गांधी की जन्मभूमि जाने का अवसर मिला। महात्मा गांधी का एक प्रसिद्ध कथन है, जिसका सार है, जो परिवर्तन आप दुनिया में देखना चाहते हैं, वह स्वयं बनें। प्रिय नरेंद्र मोदी, हम इस बात को मिलकर दिल से अपनाना चाहते हैं। हम भारत और जर्मनी के बीच संबंधों को एक नए, बल्कि और भी उच्च स्तर पर ले जाना चाहते हैं!
आज आपने मुझे अपनी जन्मभूमि, अपने गृह राज्य गुजरात में आमंत्रित किया है। इस विशेष सम्मान के लिए मैं हार्दिक आभार व्यक्त करना चाहता हूं। यह हमारे दोनों देशों के बीच गहरे जुड़ाव का प्रतीक है, साथ ही मेरे प्रति मित्रता का भी। इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं। यह शहर, जहां हम आज हैं, अहमदाबाद, एक तरह से आधुनिक भारत का उद्गम स्थल है। यहीं से गांधीजी ने स्वतंत्रता, आत्मनिर्णय और लोकतंत्र के लिए अहिंसक संघर्ष का नेतृत्व किया था।
गुजरात, भारत का यह भाग, एक प्रभावशाली आर्थिक गतिशीलता का प्रतीक है, एक ऐसी गतिशीलता जो वस्त्र उद्योग से लेकर अत्याधुनिक स्मार्ट औद्योगिक पार्कों और जीवंत स्टार्टअप जगत तक फैली हुई है। यह क्षेत्र विश्वविद्यालयों, इंजीनियरों और अनुप्रयुक्त अनुसंधान का भी एक जीवंत केंद्र है। इसलिए गुजरात में यह समझना आसान है कि मेरी यह यात्रा आज हम दोनों के लिए कितना मायने रखती है, वे मूलभूत राजनीतिक मूल्य जो हमें एकजुट करते हैं, हमारे सामने मौजूद अपार आर्थिक अवसर और कुशल श्रमिकों और शिक्षा के संबंध में हमारी बढ़ती परस्पर निर्भरता।
विशेष रूप से विश्व में हो रहे गहन भू-राजनीतिक परिवर्तनों और उथल-पुथल को देखते हुए, हम अपनी रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करने में रुचि रखते हैं। यद्यपि यूरोप और अंतर-अटलांटिक संबंध हम जर्मनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, फिर भी हमें अब एक व्यापक साझेदारी नेटवर्क का निर्माण करना होगा, जो त्वरित और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से हो। इस प्रयास में भारत जर्मनी का पसंदीदा साझेदार है।
हमारी नवीनीकृत और गहन साझेदारी के लिए आज की परिस्थितियां इससे बेहतर शायद ही हो सकती हैं। यूरोपीय संघ के सबसे अधिक आबादी वाले और आर्थिक रूप से सबसे शक्तिशाली सदस्य देश के रूप में जर्मनी, और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत मूलभूत मूल्यों से एकजुट हैं। अत्यधिक गतिशील भारत और तकनीकी रूप से अग्रणी देश जर्मनी के हित एक समान हैं। यही वह आधार है जिस पर हम आगे बढ़ रहे हैं।
मैं तीन प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डालना चाहूंगा। पहला, हम एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं जिसमें हम स्वतंत्र और सुरक्षित रूप से रह सकें; क्योंकि आज जब हम यहां एकत्रित हुए हैं, दुनिया तेजी से हो रहे परिवर्तनों के दौर से गुज़र रही है। दुनिया तेजी से महाशक्ति की राजनीति और प्रभाव क्षेत्रों की मानसिकता से प्रभावित हो रही है। उथल-पुथल का दौर चल रहा है। हमें मिलकर इसका सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।
यूक्रेन के खिलाफ रूस का आक्रामक युद्ध शायद इस उथल-पुथल की सबसे भयावह अभिव्यक्ति है। इस नई दुनिया में, हम मिलकर उन मूल्यों और हितों की रक्षा करेंगे जो हमें एकजुट करते हैं। नहीं, हम हर मुद्दे पर सहमत नहीं होते। न ही हम अपने अधिकांश यूरोपीय पड़ोसियों से सहमत हैं, लेकिन तब भी हमारे बीच जो साझा आधार है, वह बहुत महत्वपूर्ण है।
जर्मनी में पहले से ही 60,000 भारतीय युवा पढ़ाई कर रहे हैं, जो मेरे देश में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का सबसे बड़ा समूह है। जर्मनी में उच्च योग्यता प्राप्त भारतीय पेशेवरों की तत्काल आवश्यकता है और उनकी संख्या तेजी से बढ़ भी रही है। भारतीय पहले से ही जर्मनी में सबसे सफल आप्रवासियों में से हैं। हम भविष्य में भी इस प्रवृत्ति का समर्थन और प्रोत्साहन जारी रखना चाहते हैं। हम इसे और मजबूत करना चाहते हैं, उदाहरण के लिए भारत में जर्मन भाषा के लिए डिजिटल शिक्षण के अवसरों का विस्तार करके। और अंत में 'ग्लोबल स्किल्स पार्टनरशिप '(वैश्विक कौशल साझेदारी) के माध्यम से हम स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भारतीय पेशेवरों के लिए एक ढांचा तैयार कर रहे हैं।
प्रिय नरेंद्र मोदी, जैसा कि आपने बताया, जर्मनी और भारत दो महान लोकतंत्र और दो मजबूत अर्थव्यवस्थाएं हैं, जो कई मायनों में एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। हम इस पर आगे बढ़ना चाहते हैं और ऐसा करते हुए हम अपनी सुरक्षा साझेदारी और समग्र साझेदारी को और गहरा करेंगे। हम अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत करेंगे, भारत और जर्मनी में प्रतिभाओं को संयुक्त रूप से बढ़ावा देंगे। यह हम दोनों पक्षों के हित में है।
हम यह इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हम एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं। विभिन्न मुलाकातों से और विशेष रूप से आज की मुलाकात के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से हम और क़रीब आए हैं। इसलिए मुझे आज आपकी मातृभूमि में आकर बहुत खुशी हो रही है। मैं इस वर्ष के अंत में जर्मनी में जर्मन-भारतीय सरकारी परामर्शों के लिए आपका स्वागत करने के लिए उत्सुक हूं, जिसकी मेजबानी हम इस वर्ष करेंगे।
अंत में मुझे अपने निकटवर्ती पड़ोसी देश ईरान में हो रहे घटनाक्रमों के बारे में कुछ कहने की अनुमति दें, मैं ईरानी नेतृत्व से अपील करता हूं कि वे अपने लोगों को धमकाने के बजाय उनकी रक्षा करें। हम तेहरान के नेतृत्व द्वारा उनके अपने ही लोगों के विरुद्ध की जा रही हिंसा की घोर निंदा करते हैं। यह हिंसा शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि कमजोरी का प्रदर्शन है। इस हिंसा का अंत होना चाहिए। कृपया मुझे यह बात अंत में कहने की अनुमति दें, क्योंकि भारत में हमारी इस बैठक के दौरान भी ईरान से आ रही खबरें हमें लगातार परेशान कर रही हैं।