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नेपाल में भीषण बाढ़ से तबाही, 55 लोगों की मौत, सैकड़ों लापता, बिहार में भी दहशत

Nepal flood
Nepal Floods Disaster: भारत के पड़ोसी देश नेपाल में मूसलाधार बारिश, भीषण बाढ़ और विनाशकारी भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। कुदरत के इस कहर के कारण नेपाल में अब तक 55 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 400 से ज्यादा लोग लापता है। इनमें 133 भारतीय शामिल हैं। अन्य देशों के लोगों के भी लापता होने की खबरें हैं। नेपाल की उफनती नदियों और बैराजों से छोड़े जा रहे पानी के चलते भारत के सीमावर्ती राज्यों— विशेषकर बिहार और उत्तर प्रदेश में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है, जिसके बाद दोनों राज्यों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया गया है।
 
दरअसल, बुधवार सुबह मध्य नेपाल के पहाड़ी ज़िले रसुवा में भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने नदी के किनारे बसे इलाकों में भारी तबाही मचाई है। रसुवा की बस्तियां सबसे ज़्यादा प्रभावित हुई हैं। बाढ़ ने एक पनबिजली परियोजना को बहा दिया और चिलिमे पनबिजली परियोजना सहित अन्य परियोजनाओं को भी नुकसान पहुचाया।


सैकड़ों लोगों का अब तक पता नहीं है। इनमें 133 भारतीय बताए जा रहे हैं। 93 नेपाली, 3 अमेरिकी नागरिक और 12 ब्रिटिश नागरिक शामिल हैं। हाइड्रोपावर प्लांट में काम करने वाले 8 दक्षिण कोरियाई नागरिक भी लापता बताए जा रहे हैं। अन्य लापता लोगों में 17 मलेशियाई नागरिक, 4 दक्षिण अफ्रीकी और ऑस्ट्रेलिया व नीदरलैंड का एक-एक व्यक्ति शामिल है। करीब 400 मानसरोवर यात्रियों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मरने वालों की संख्या बढ़कर 55 हो गई है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि यह संख्या और बढ़ सकती है।


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भारतीय दूतावास ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर

भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने आपातकालीन नंबर जारी किए हैं। प्रभावित लोग +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं। नेपाल टूरिज्म बोर्ड ने भी मदद के लिए टोल-फ्री नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और टूरिस्ट पुलिस नंबर 9851289445 जारी किया है। 
 
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 400 मानसरोवर तीर्थयात्री रसुवागढ़ी में संपर्क से बाहर हो गए हैं। सुबह-सुबह आए अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने रसुवा में नेपाल-चीन सीमा के पास गांवों को अपनी चपेट में ले लिया और सड़कों व अन्य ज़रूरी बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया। 

काठमांडू स्थित 'टच कैलाश ट्रैवल्स एंड टूर्स' के मैनेजिंग डायरेक्टर बाशु कुमार अधिकारी ने बताया कि बुधवार को 390 तीर्थयात्रियों (जिनमें 93 नेपाली शामिल थे) को सीमा पार करनी थी। अधिकारी ने कहा कि कुछ लोगों को छोड़कर, हम दोपहर 3 बजे तक तीर्थयात्रियों से संपर्क नहीं कर पाए हैं। ये तीर्थयात्री अलग-अलग ट्रैवल एजेंसियों के क्लाइंट हैं।

चीन-नेपाल का ट्रेड रूट तबाह

नेपाल के बेट्रावती से रसुवागढ़ी चीन सीमा तक जाने वाली करीब 42 किलोमीटर की सड़क बाढ़ में कई जगह से बह गई, कई पुल टूट गए। दरअसल, यह रास्ता नेपाल को चीन से जोड़ता है। भारत के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर चीन वाला रास्ता लंबे समय तक बाधित रहता है तो नेपाल की सप्लाई जरूरतों में भारत की भूमिका और बढ़ सकती है।

बिहार में गहराया बाढ़ का खतरा

दूसरी ओर, नेपाल की नदियों का पानी भारतीय सीमा में प्रवेश करने से बिहार के सीमावर्ती इलाकों में दहशत का माहौल है। नेपाल में उफनती नदियों के जलस्तर को देखते हुए कोसी बैराज (वीरपुर) और वाल्मीकि नगर (गंडक) बैराज के सभी फाटक खोल दिए गए हैं, जिससे रिकॉर्ड मात्रा में पानी छोड़ा गया है। बिहार के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, अररिया, सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, मधुबनी और पूर्णिया जैसे जिलों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। राज्य सरकार ने जल संसाधन विभाग और आपदा प्रबंधन टीम (SDRF/NDRF) को 24 घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। 

उत्तर प्रदेश में भी अलर्ट

नेपाल से सटे उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और तराई इलाकों में भी प्रशासन पूरी तरह चौकस है। महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच और लखीमपुर खीरी जैसे जिलों में राप्ती और घाघरा नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तराई जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि नदियों के जलस्तर की निरंतर निगरानी की जाए और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों या राहत शिविरों में पहुंचाने की व्यवस्था की जाए।
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