NCERT का बड़ा फैसला! कक्षा 8वीं की किताब से हटेगा 'न्यायिक भ्रष्टाचार' का चैप्टर, सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद मंचा हड़कंप
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी आपत्ति के बाद NCERT कक्षा 8वीं की सोशल साइंस (CBSE) की पाठ्यपुस्तक से न्यायिक भ्रष्टाचार (Judicial Corruption) से जुड़े अंशों को हटा सकता है। सूत्रों के अनुसार नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने अपनी वेबसाइट से नई सोशल साइंस की किताब को पहले ही हटा लिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस चैप्टर में अदालतों में लंबित मामलों और जजों की कमी का डेटा दिया गया था। साथ ही 'न्यायिक भ्रष्टाचार' को रेखांकित करने के लिए पूर्व सीजेआई बीआर गवई के एक बयान का भी हवाला दिया गया था। सिब्बल ने CJI सूर्यकांत, जस्टिस विपुल एम पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच को बताया कि क्लास 8 के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा है। यह निंदनीय है। सिंघवी ने कहा कि NCERT ने मान लिया है कि राजनीति, ब्यूरोक्रेसी और अन्य संस्थानों में भ्रष्टाचार है ही नहीं।
कैसे गरमाया मामला
यह मामला तब गरमाया जब सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने न्यायपालिका के खिलाफ की गई 'आपत्तिजनक' टिप्पणियों पर स्वतः संज्ञान लिया। चीफ जस्टिस सूर्या कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पांचोली की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद मामले पर विचार किया। सूत्रों के मुताबिक सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और जल्द ही विवादित अंशों को किताबों से हटाया जा सकता है।
एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद) की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों में कहा गया है कि भ्रष्टाचार, लंबित मामलों का भारी बोझ और न्यायाधीशों की पर्याप्त संख्या की कमी न्यायिक प्रणाली के सामने आने वाली चुनौतियों में से हैं।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि भ्रष्टाचार से जुड़ा डेटा संसदीय रिकॉर्ड और नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड पर उपलब्ध है, लेकिन इसके बावजूद केंद्रीय कानून मंत्रालय से तथ्यों की पुष्टि (Cross-verification) नहीं की गई। Edited by : Sudhir Sharma