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Last Modified: वाराणसी (उत्तर प्रदेश) , बुधवार, 25 फ़रवरी 2026 (19:32 IST)

मणिकर्णिका घाट पर 'मसान की होली' पर बढ़ा विवाद, डोम राजा परिवार ने उठाए सवाल, परंपरा को लेकर दी यह चेतावनी

Controversy escalates over Masaan Holi at Manikarnika Ghat
Controversy escalates over Masaan Holi at Manikarnika Ghat : उत्‍तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी के प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर मनाई जाने वाली 'मसान की होली' विवादों के घेरे में आ गई है। खबरों के अनुसार, 'मसान की होली' को लेकर डोम राजा परिवार के वंशज विश्वनाथ चौधरी ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर इस आयोजन पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि चिता की राख से होली खेलने की परंपरा शास्त्रसम्मत नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आयोजन नहीं रोका गया तो वे महाश्मशान में में दाह संस्कार रोकने को बाध्य होंगे।
 

डोम राजा परिवार ने सौंपा ज्ञापन 

उत्‍तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी के प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर मनाई जाने वाली 'मसान की होली' विवादों के घेरे में आ गई है। 'मसान की होली' को लेकर डोम राजा परिवार के वंशज विश्वनाथ चौधरी ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर इस आयोजन पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि चिता की राख से होली खेलने की परंपरा शास्त्रसम्मत नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आयोजन नहीं रोका गया तो वे महाश्मशान में में दाह संस्कार रोकने को बाध्य होंगे।

देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना आयोजन

मान्यता है कि भगवान शिव विवाह के बाद माता पार्वती को काशी लाए थे। उस समय उनके गणों ने भी उत्सव की इच्छा जताई, जिसके बाद श्मशान में होली खेलने की परंपरा शुरू हुई। मणिकर्णिका घाट को काशी का महाश्मशान कहा जाता है, जहां 24 घंटे दाह संस्कार होते हैं। 'मसान की होली' का यह आयोजन अघोरी और तांत्रिक परंपराओं से भी जुड़ गया और अब यह देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुका है।
 

श्मशान की पवित्रता और मर्यादा होती है भंग

डोम राजा परिवार और काशी विद्वत परिषद से जुड़े कुछ विद्वानों का तर्क है कि किसी भी प्रमुख पुराण या शास्त्र में ‘मसान की होली’ का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता। उनका आरोप है कि हाल के वर्षों में इस आयोजन का स्वरूप बदल गया है और इसमें बाहरी लोगों की भीड़, हुड़दंग तथा अनुशासनहीनता बढ़ी है। शवों के समक्ष अनुचित व्यवहार करने के साथ महिलाएं व नाबालिग वीडियो बनाते नजर आते हैं, जिससे श्मशान की पवित्रता और मर्यादा भंग होती है।
 

क्‍या कहते हैं आयोजक

दूसरी ओर आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि काशी स्वयं महाश्मशान है, जहां मृत्यु को भी मोक्ष और उत्सव की दृष्टि से देखा जाता है। उनके अनुसार 'मसान की होली' जीवन और मृत्यु के दार्शनिक संतुलन का प्रतीक है। उनका दावा है कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और इसे अचानक रोकना सांस्कृतिक विरासत पर आघात होगा। विवाद को देखते हुए जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। प्रशासन दोनों ही पक्षों की दलीलों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में है।
Edited By : Chetan Gour
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