Chabahar port : चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी प्रतिबंधों की काली छाया, जानिए क्या कूटनीति अपनाएगा भारत
चाबहार बंदरगाह (Chabahar port) को लेकर भारत की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। ईरान पर अमेरिका के बढ़ते दबाव के बीच, भारत इस परियोजना में अपनी मौजूदगी सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न विकल्पों की तलाश कर रहा है। ट्रंप प्रशासन ने तेहरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी है। ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में चाबहार बंदरगाह के विकास में भारत एक प्रमुख भागीदार है। यह बंदरगाह भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और व्यापारिक महत्वाकांक्षाओं का केंद्र है। ईरान में सरकार-विरोधी व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं जिनमें 2,500 से अधिक लोग मारे गए हैं।
विशेष इकाई का गठन
ट्रंप प्रशासन द्वारा चाबहार बंदरगाह को दी गई प्रतिबंधों की 6 महीने की छूट अप्रैल में समाप्त हो रही है। इस समय- सीमा को देखते हुए, भारत सरकार ने अपनी सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों और अधिकारियों को अमेरिकी प्रतिबंधों के जोखिम से बचाने के लिए कई एहतियाती कदम उठाए हैं। एक प्रमुख विकल्प के तौर पर भारत एक ऐसी विशेष इकाई (Entity) के गठन पर विचार कर रहा है, जो 'शहीद बेहेश्ती टर्मिनल' के संचालन की जिम्मेदारी संभालेगी। इस इकाई को इस तरह तैयार किया जाएगा कि वह या तो प्रतिबंधों के दायरे से बाहर रहे या उनके प्रभाव को झेलने में सक्षम हो। मामले के जानकार सूत्रों के अनुसार, भारत चाबहार बंदरगाह परियोजना में अपनी प्रत्यक्ष हिस्सेदारी समाप्त करने के उद्देश्य से लगभग 12 करोड़ अमेरिकी डॉलर हस्तांतरित करने की प्रक्रिया में है।
भारत के लिए क्यों जरूरी है चाबहार?
चाबहार बंदरगाह केवल एक व्यापारिक केंद्र नहीं, बल्कि भारत के लिए भू-राजनीतिक सेतु है। यह अफगानिस्तान, मध्य एशिया और रूस के साथ व्यापार का मुख्य मार्ग है। INSTC: यह 7,200 किलोमीटर लंबे अंतराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे का हिस्सा है, जो यूरोप तक पहुंच आसान बनाता है।
धमकी का भारत-ईरान व्यापार पर कितना असर
ईरान ने कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का साथ दिया है, जिसे देखते हुए चाबहार में उपस्थिति बनाए रखना अनिवार्य है। ट्रंप की चेतावनी और भारत का रुख अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी है। हालांकि भारतीय अधिकारियों का मानना है कि इसका भारत पर असर मामूली होगा। आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में भारत-ईरान व्यापार महज 1.68 अरब डॉलर था, जो भारत के कुल वैश्विक व्यापार का मात्र 0.15% है।
अनिश्चितता का माहौल फिलहाल ट्रंप की इस धमकी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, क्योंकि यह केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित है और अब तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। गौरतलब है कि भारत पहले से ही रूसी तेल खरीद के कारण कुछ दंडात्मक शुल्कों सहित कुल 50% अमेरिकी टैरिफ का सामना कर रहा है।
क्या कहा विदेश मंत्रालय ने
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को मीडिया से कहा कि भारत इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है। ईरान के साथ व्यापारिक संबंध रखने वाले देशों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए नये टैरिफ के मद्देनजर इस समझौते से भारत के हटने की अटकलों के बीच एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने यह टिप्पणी की।
जायसवाल ने कहा कि जैसा कि आप जानते हैं, 28 अक्टूबर को अमेरिकी वित्त विभाग ने एक पत्र जारी कर 26 अप्रैल, 2026 तक वैध सशर्त प्रतिबंध छूट के संबंध में दिशा-निर्देश दिए थे। हम इस व्यवस्था को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिकी पक्ष के साथ बातचीत कर रहे हैं। जायसवाल ने ईरान के साथ भारत के दीर्घकालिक संबंधों का भी जिक्र किया और कहा कि नई दिल्ली, तेहरान में चल रही स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है। Edited by : Sudhir Sharma