जीएसटी पर बड़ा फैसला, माह में एक ही बार भरना होगा रिटर्न

नई दिल्ली| पुनः संशोधित शनिवार, 5 मई 2018 (07:42 IST)
नई दिल्ली। वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने डिजिटल माध्यम खरीदारी करने वाले ग्राहकों को 100 रुपए तक प्रोत्साहन देने के मुद्दे पर चर्चा की और एकल मासिक रिटर्न के लिए नए मॉडल तथा जीएसटीएन को सरकारी स्वामित्व वाली इकाई बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। परिषद ने कुछ राज्यों के विरोध को देखते हुए चीनी पर उपकर लगाने के बारे में फैसला टाल दिया।
वित्तमंत्री अरूण जेटली की अध्यक्षता में शुक्रवार को जीएसटी परिषद की 27वीं बैठक हुई। बैठक के बाद जेटली ने कहा कि कुछ अपवादों को छोड़कर सभी करदाताओं के महीने में एक ही दाखिल करने की जरूरत होनी चाहिए। इस समय उन्हें मासिक स्तर पर कई रिटर्न दाखिल करने पड़ते हैं।
उन्होंने कहा कि पंजीबद्ध व्यक्ति के कारोबार के आधार पर रिटर्न फाइलिंग तारीखें क्रमबद्ध होनी चाहिए ताकि आईटी प्रणाली पर भार का प्रबंधन किया जा सके। कंपोजिशन डीलर व शून्य लेनदेन वाले डीलरों को त्रैमासिक रिटर्न दाखिल करने की सुविधा मिलनी चाहिए।

वित्त सचिव हसमुख अधिया ने कहा कि मासिक रिटर्न फाइल प्रणाली छह महीने में प्रभावी हो जाएगी तथा जीएसटीआर 3बी व जीएसटीआर1 फार्म के जरिए रिटर्न दाखिल करने की मौजूदा प्रणाली छह महीने से ज्यादा समय तक जारी नहीं रहेगी।
खरीदारी का भुगतान डिजिटल माध्यम या चैक आदि से किए जाने पर प्रोत्साहन के मुद्दे पर परिषद के ज्यादातर राज्य कारोबार से उपभोक्ता (बी2सी) आपूर्ति पर जीएसटी दर (जहां दर तीन प्रतिशत या अधिक है) पर दो प्रतिशत रियायत देने के प्रस्ताव पर सहमत थे। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिए जाने के लिए इसके तहत अधिकतम 100 रुपए (प्रति भुगतान) प्रोत्साहन का प्रस्ताव है। लेकिन कुछ राज्य एक छोटी ‘निषेधात्मक सूची’ बनाए जाने के पक्ष में हैं। इसलिए इस मुद्दे को राज्यों के वित्तमंत्रियों के पांच सदस्यीय समूह के पास भेजा जाएगा।
उन्होंने कहा कि जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) को सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी में बदलने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया। जीएसटी नेटवर्क, जीएसटी के लिए आईटी बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने वाली कंपनी है। इसके तहत ‘निजी इकाइयों के स्वामित्व वाली 51% हिस्सेदारी सरकार खरीदेगी और अंतत: इस कंपनी में केंद्र सरकार की 50% जबकि राज्य सरकारों की संयुक्त रूप से 50% हिस्सेदारी होगी।’

जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) में इस समय भारत सरकार की हिस्सेदारी 24.5 प्रतिशत है। इतनी ही हिस्सेदारी सामूहिक रूप से सभी राज्य सरकारों की है। बाकी 51 प्रतिशत हिस्सेदारी पांच निजी वित्तीय संस्थानों में है जिनमें एचडीएफसी लिमिटेड, एडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एनएसई स्ट्रेटेजिक इन्वेस्टमेंट व एलआईसी हाउसिंग फिनांस की है।
सरलीकृत रिटर्न प्रणाली की ओर जाने का काम चरणबद्ध तरीके से तीन चरणों होगा। जीएसटीआर1 व जीएसटीआर 3बी रिटर्न छह महीने तक जारी रहेंगे, उसके अगले छह महीने के लिए अस्थायी क्रेडिट की संभाव्यता के साथ एकल रिटर्न तथा तीसरे चरण में केवल आन लाइन प्रणाली पर आपूर्तिकर्ताओं की ओर से दाखिल कराई गई पर्चियों एनवायस के आधार पर क्रेडिट के साथ एकल रिटर्न की व्यवस्था लागू की जाएगी। (भाषा)



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