कफ सिरप ने खराब की भारत की अंतराष्ट्रीय छवि, अब केंद्र ने लिया ये बड़ा फैसला, जानिए क्या है कफ सिरप के नए नियम?
डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बगैर नहीं मिलेगा कफ सिरप, राजस्थान- एमपी में हुई थीं बच्चों की मौतें
सर्दी खांसी के लिए कफ सिरप किसी भी मेडिकल स्टोर पर आसानी से मिल जाते हैं, बगैर डॉक्टर के प्रिस्क्रप्शन के भी कई स्टोर संचालक मरीजों को ये सिरप दे देते हैं। लेकिन अब केंद्र सरकार बगैर डॉक्टर के प्रिस्क्रप्शन के कफ सिरप बेचने पर लगाम लगाने जा रही है। दरअसल, सरकार की शीर्ष नियामक औषध परामर्श समिति ने 67वीं बैठक में इस फैसले को मंजूरी दे दी गई है।
बता दें कि कुछ दिनों पहले मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और आसपास के जिलों में कम से कम 24 बच्चों की 'कोल्ड्रिफ' सिरप पीने के बाद गुर्दे की खराबी से मौत हो गई। साथ ही राजस्थान और गुजरात सहित कुछ अन्य राज्यों में भी ऐसे ही मामले सामने आए थे।
ओवर द काउंटर सूची से बाहर कफ सिरप : बता दें कि केंद्र ने कफ सिरप की अनियंत्रित बिक्री रोकने के लिए बिना डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन के बिक्री पर पाबंदी लगाई है। सरकार की औषध परामर्श समिति की बैठक में कफ सिरप को ओवर द काउंटर दवाओं की सूची से बाहर किया है। बता दें कि हाल ही में मध्यप्रदेश में कफ सिरप पीने से कई बच्चों की मौत हो गई थी। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की छवि खराब हो रही थी, ऐसे में सरकार ने यह कदम उठाया है।
मध्यप्रदेश में मचा था हड़कंप : बता दें कि मध्य प्रदेश में पिछले दिनों कफ सिरप पीने से कई बच्चों की मौतों के मामले सामने आए थे। इन मामलों के बाद प्रदेश के साथ ही देश भर में हड़कंप मच गया था। अब इन मामलों को केंद्र सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। इसके तहत अब देश भर के दवा विक्रेता बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के कफ सिरप नहीं बेच सकेंगे।
किसने लगाई रोक : सरकार की शीर्ष नियामक औषध परामर्श समिति ने अपनी 67वीं बैठक में कफ सिरप की अनियंत्रित बिक्री पर रोक लगाने के लिए यह फैसला किया है, जिसके बाद अब देश भर में आसानी से कफ सिरप उपलब्ध नहीं होगा। सरकार का लक्ष्य है कि लोग ओवर द काउंटर की जगह डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन से दवा लें।
अब तक क्या हो रहा है : बता दें कि अब तक ज्यादातर कफ सिरप ओवर द काउंटर बेचे जा रहे थे, लेकिन केंद्र सरकार के नए फैसले के बाद अब इस पर लगाम लग सकेगी। सरकार की शीर्ष नियामक औषध परामर्श समिति ने 67वीं बैठक में इस फैसले को मंजूरी दे दी गई है। इसके तहत अब कफ सिरप को उन दवाओं की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है, जिन्हें ओवर द काउंटर बेचा जा सकता है।
क्या चाहती है सरकार : दरअसल, सरकार की कोशिश है कि लोग दवा विक्रेताओं से सीधे दवा न खरीदें और डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर ही दवा लें। इसके कई फायदे हैं। एक तो दवाओं के नशे के लिए इस्तेमाल पर रोक लगेगी। दूसरी ओर डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बिना कई बार लोग बिना किसी जरूरत के धड़ल्ले से एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल करते हैं। इसके कारण एंटीबायोटिक्स असर नहीं करती है और शरीर में संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया एंटीबायोटिक दवाओं पर प्रतिक्रिया करना बंद कर देते हैं।
भारतीय कफ सिरप का खराब इतिहास : बता दें कि कुछ दिनों पहले मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और आसपास के जिलों में कम से कम 24 बच्चों की 'कोल्ड्रिफ' सिरप पीने के बाद गुर्दे की खराबी से मौत हो गई। साथ ही राजस्थान और गुजरात सहित कुछ अन्य राज्यों में भी ऐसे ही मामले सामने आए थे। देश के साथ ही अन्य देशों से भी ऐसे मामले सामने आने के बाद देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान झेलना पड़ा था। खासतौर पर उज्बेकिस्तान में भारतीय कफ सिरप पीने के बाद 68 बच्चों की मौत के मामले में 21 लोगों को सजा सुनाई गई थी। इसी तरह इंडोनेशिया में भी ऐसे ही कफ सिरप पीने से 2022 और 2023 के बीच 200 से अधिक बच्चों की मौत हो गई थी। गाम्बिया में भी ऐसे ही मामले सामने आए थे। इसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भारत में बनी तीन मिलावटी दवाओं की पहचान की थी। इनमें श्रीसन फार्मास्युटिकल्स की कोल्ड्रिफ के अलावा रेडनेक्स फार्मास्युटिकल्स की रेस्पिफ्रेश टीआर और शेप फार्मा की रीलाइफ भी शामिल थी।
Edited By: Navin Rangiyal