Motivation Quotes : दिमाग ही तुम्हारा दुश्‍मन है...

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यूजी कृष्‍णमूर्ति एक दार्शनिक थे। ओशो रजनीश से मोहभंग होने के बाद फिल्मकार महेश भट्ट इन्हीं की शरण में गए थे और वे उनके शिष्य बन गए थे। यूजी कृष्णभूर्ति ने अपना रास्ता खुद बनाया था और वे मानते थे कि ईश्वर नाम की कोई ताकत इस दुनिया में नहीं है। यूजी का मानना था कि दुनिया में जो भी हिंसा है वह धर्म के तथाकथित मसीहाओं के कारण है। आओ जानते हैं उनके कुछ खास विचार, जो संभवत: आपके जीवन में आपके काम आ सकें।

1. श्री यू.जी. कृष्णमूर्ति समझाते हैं कि समस्त तीर्थ, योग, ध्यान, संन्यास, गुरु-शिष्य संबंध और आध्यात्मिक विकास इत्यादि मनुष्य के मन के संगम हैं, मन के खेल मात्र हैं। और इन सब में खूब-खूब भटककर अंत में आदमी के हाथ में एक पूर्ण असहाय दशा भर आती है। तुम्हारी समस्या बाहर नहीं दिमाग में है।


2. समाज ने आपके सामने एक 'आदर्श' को रखा है। आपका जन्म किसी भी संस्कृति में हुआ हो, आपके पास शास्त्रोक्त सिद्धांत और परंपराएं हैं ताकि आपको बता सकें कि आपको कैसा व्यवहार करना है। आपको बताया जाता है कि साधना के माध्यम से आप अंततः ऋषि, संतों और मानव जाति के रक्षकों द्वारा प्राप्त राज्य में भी आ सकते हैं। और, इसलिए आप अपने व्यवहार को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं, अपने विचारों को नियंत्रित करने के लिए, कुछ अप्राकृतिक होने के लिए। जबकि प्रकृति बिल्कुल अद्वितीय व्यक्तियों के निर्माण में व्यस्त है, जबकि संस्कृति ने एक ही सांचे का आविष्कार किया है जिसे सभी को बदलना चाहिए। यह ग्रोटेस्क है।

3. यह डर है जो आपको विश्वास दिलाता है कि आप जीवित हैं और आप मर जाएंगे। जो हम नहीं चाहते वो खत्म होने का डर है। भय वह चीज है जिससे आप मुक्त नहीं होना चाहते, जिसे आप 'स्वयं' कहते हैं वह भय है। 'आप' डर से पैदा होते हैं; वह डर से जीता है, डर से काम करता है और डर से मरता है।"

4. तुम्हारी बौद्धिक समझ, जिसमें तुमने ढेर सारा निवेश किया है, उसने अभी तक तुम्हारे लिए एक भी अच्छा काम नहीं किया है।

5. विचार तुम्हारी कोई मदद नहीं करते हैं।

6. आदमी सिर्फ एक स्मृति है। आप अपने आस-पास की चीजों को उस ज्ञान की मदद से समझते हैं जो आप में डाला गया था। आपको शायद अपनी आधुनिक कला को समझाने के लिए कलाकार की आवश्यकता है, लेकिन आपको फूल को समझने के लिए किसी की सहायता की आवश्यकता नहीं है। आप कुछ भी कर सकते हैं, आप कुछ भी कर सकते हैं यदि आप काल्पनिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपनी ऊर्जा बर्बाद नहीं करते हैं।

यूजी का परिचय : यूजी कृष्णमूर्ति का जन्म 9 जुलाई 1918 को आंध्र प्रदेश के तटीय इलाके के मछलीपट्टनम में हुआ। उनकी माता के निधन के बाद उनके ने उनका पालन पोषण किया जो कि उस समय के माने-जाने वकील थेऔर ब्रह्मविद्या समाज थियोसोफिकल सोसायटी से भी जुड़े थे। साउथ की एक्ट्रेस गौतमी उनकी खास रिश्तेदार हैं। और साउथ की मशहूर मॉडल सौम्या बौलापरगद्दा उनकी पोती लगती हैं। 1939 में 21 साल की उम्र में कृष्णमूर्ति ने एक प्रसिद्ध आध्यामिक शिक्षक रमण महर्षि से मुलाकात की। इसके बाद स्वामी शिवानंद के सम्पर्क में आए। जब वो मात्र 20 साल के थे, तभी वो हिमालय की यात्रा पर निकल गए और करीब सात साल उन्होंने हिमालय की गोद में बिताए। 1941 में उन्होंने थियोसोफिकल सोसायटी के साथ मिलकर काम करना शुरू किया। 943 में उन्होंने कुसमा कुमारी जो कि ब्राह्मण ही थीं, उनसे शादी कर ली। उस समय उनकी उम्र मात्र 25 साल थी। कृष्णमूर्ति जब इटली के वालिक्रोशिया में थे, तो उनका वहां पैर फिसल गया। और चोट लगने के कारण वो सात हफ्तों तक बैड पर रहे। इसी कारण वो ज्यादा नहीं जी पाए और 22 मार्च 2007 को वो अनंत यात्रा पर चले गए। उनकी मौत के अगले दिन उनके शिष्य महेश भट्ट ने उनका अंतिम संस्कार कर दिया। द एंटी गुरु और दिमाग ही दुश्मन है, उनकी सबसे ज्यादा पढ़ी जानें वाली किताबें हैं।



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