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दो शब्द

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Wednesday,May 14, 2008



दीप जलें हर द्वार, तभी सजेगा समृद्धि का संसार

दीप जलें हर द्वार, तभी सजेगा समृद्धि का संसारजब कुछ घरों में प्रकाश का उत्सव हो, तो कुछ घरों के अंधेरे की चिंता भी आवश्यक है। दीपावली केवल दीप जलाने का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर झांकने और समाज के प्रति अपने दायित्व को समझने का अवसर भी है। हर वर्ष हम अपने घरों को ज्योतिर्मय करते, मां लक्ष्मी का स्वागत कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। लेकिन क्या कभी हमने विचार किया कि जिस समाज में हम समृद्धि का उत्सव मना रहे हैं,वहां कितने घर ऐसे हैं,जहां त्योहार की खुशियां भी आय और खर्च के गणित में उलझकर रह जाती हैं? जब बाजारों में करोड़ों की खरीदारी होती है,तब क्या हम उन परिवारों की चिंता करते हैं,जिनके लिए बच्चों को नए कपड़े दिलाना भी एक बड़ी उपलब्धि है?

राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस: शुरुआती पहचान और समय पर उपचार से बढ़ सकती हैं स्वस्थ जीवन की संभावनाएं

राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस: शुरुआती पहचान और समय पर उपचार से बढ़ सकती हैं स्वस्थ जीवन की संभावनाएंइंदौर। देशभर में हर साल 7 नवंबर को 'राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस' मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य आम जनता को कैंसर के प्रति जागरूक करना तथा इसकी रोकथाम, शुरुआती पहचान और समय पर उपचार के महत्व के बारे में जानकारी देना है। कैंसर आज एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है, फिर भी समाज में इस बीमारी को लेकर कई तरह की भ्रांतियां और डर व्याप्त हैं। जागरूकता की कमी, शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना और समय पर चिकित्सकीय परामर्श न लेना कई बार बीमारी के निदान में देरी का कारण बन जाता है। ऐसे में यह अत्यंत आवश्यक है कि लोग कैंसर के संबंध में सही जानकारी प्राप्त करें और अपनी सेहत के प्रति सजग रहें।

भारत के लिए ट्रम्प से ज्यादा खतरनाक है डेमोक्रेट्स!