0

दो शब्द

बुधवार,मई 14, 2008
0
1
हाल ही में एक मित्र के घर जाना हुआ था, सभी मित्रों की जवीनशैली में लेटनाइट पार्टीज़, डिस्को, मस्ती और वो सारी चीज़े शामिल थीं जो 21वीं सदी का भारतीय युवा शौक से करता है। हॉल में चर्चाओं का दौर चल रहा था, और अचानक ही कानों में गिटार की धुन गूँज उठी
1
2
पूरे विश्व की जनन‍ी है माँ। अगर एक नारी ना होती तो शायद भगवान भी सोच में पड़ जाते कि इस दुनिया की रचना कैसे की जाए। भगवान ने नारी को बनाकर और उसे माँ के वात्सल्यपूर्ण शब्द से नवाज कर पूरी दुनिया पर एक बहुत ही बड़ा उपकार किया है।
2
3
माँ एक अनुभूति, एक विश्वास, एक रिश्ता नितांत अपना सा। गर्भ में अबोली नाजुक आहट से लेकर नवागत के गुलाबी अवतरण तक, मासूम किलकारियों से लेकर कड़वे निर्मम बोलों तक, आँगन की फुदकन से लेकर नीड़ से सरसराते हुए उड़ जाने तक, माँ मातृत्व की कितनी
3
4

ख्वाब

शनिवार,मई 10, 2008
कल रात हाथों में नन्‍हें से ख्‍वाब ने जन्‍म लिया ख्‍वाब... जिसका जन्‍म आज तक नहीं हुआ किसी मां ने किसी दादी ने किसी पिता ने किसी समाज ने
4
4
5
साल में एक दिन 'मदर्स डे' मनाकर, उसके लिए कुछ तोहफा लाकर या विश करके बताना। समाचार-पत्रों के पेज भरे देखकर माँ भी हौले से मुस्कुराती होगी। यह सब क्या है, क्यों‍ करते हैं ये सब। क्या दिखाना चाहते हैं। माँ का महत्व? जिस प्रकार एक गुरु के गुणों का बखान ...
5
6

बेसन की सोंधी रोटी

शनिवार,मई 10, 2008
बेसन की सोंधी रोटी पर खट्‍टी चटनी-जैसी माँ याद आती है चौका-बासन चिमटा, फुकनी-जैसी माँ बान की खुरीं खाट के ऊपर हर आहट पर कान धरे आधी सोई आधी जागी थक‍ी दोपहरी-जैसी माँ
6
7

पत्र माँ के नाम

शुक्रवार,मई 9, 2008
बहुत दिन बीत गए माँ से दूर बेटी की हालत क्या होती है शायद इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि उसे महलों की शान-शौकत भी रास न आई। माँ तेरे आँचल में छिपकर मेरे सपने सजाना आत्मा को सुकून देने वाला तेरा वो स्पर्श
7
8

मेरी शक्ति मेरी माँ !

शुक्रवार,मई 9, 2008
क्या तुम्हें मेरी याद नहीं आती है? फोन पर मेरी माँ ने मुझसे प्रश्न किया । यह बात मेरे दिल को छू गई। याद........... इस अनजाने विशाल शहर में मेरे पास माँ की स्मृतियों के सिवाय और कुछ भी नहीं था। अपने पाँव पर खड़े होने की क्षमता मेरी माँ से ही प्राप्त ...
8
8
9
आप मेंरे लिए किसी भगवान से कम नहीं हो, जिसने मेरी जिंदगी में कदम रखते ही उसे पवित्र बना दिया। मैंने कभी सोचा नहीं था कि मेरी जिंदगी को आप इतना
9
10

ऐ माँ...!

शुक्रवार,मई 9, 2008
आँचल में तेरे मुस्कुराता जीवन तुझसे महकता सृष्टि का उपवन। जहाँ में तेरा नहीं कोई सानी फानी दुनिया तुझे नहीं पहचानी। ईश्वर से बड़ा दर्जा तेरा तुझसे जिंदा है वजूद मेरा।
10
11

बच्चे की माँ

शुक्रवार,मई 9, 2008
उस माँ की नज़्र जिसकी मोहब्बत का ज़िक्र क्या...धुंधला सा अक्स भी न हुआ देखना नसीब..एक मेहमान आने वाला है इस क़दर खुश है उसकी माँ घर में
11
12

माँ तुझे सलाम

शुक्रवार,मई 9, 2008
'माँ... कितना पावन, कितना निर्मल कितना प्यारा कितना कोमल है ये माँ का नाम कर दूँ तन,मन,धन सब अर्पण फिर भी चुका सकूँ ना शायद माँ की ममता का वो दाम.......'
12
13
दुनिया में यदि कोई अपना है तो वह माँ है। माँ से तनिक भी विमुख या माँ की भावनाओं को जरा सी भी ठेस पहुँचाने वाले पुत्र को अपने पश्चाताप में उपरोक्त वर्णित पंक्तियाँ हमेशा याद रखनी चाहिए। माँ के बारे में कितना भी लिखा-कहा जाए वह उसी प्रकार कम रहेगा
13
14
बच्चा अपने जन्म के बाद जब बोलना सीखता है तो सबसे पहले जो शब्द वह बोलता है वह होता है 'माँ'। स्त्री माँ के रूप में बच्चे की गुरु है। बच्चे के मुख से निकला हुआ यह एक शब्द मात्र शब्द नहीं उस माता द्वारा नौ महीने बच्चे को अपनी कोख में पालने व उसके बाद ...
14
15

शफीक़ माँ है !

शुक्रवार,मई 9, 2008
मिरी निगाह इतनी मोतबर कहाँ थी ? कि देखता मैं तुझको तेरे अदँर चेहरगी का वो आईना भी कि शफ्फाक सा रहा है अज़ल से अब तक ।
15
16

तेरे आँगन में...

शुक्रवार,मई 9, 2008
जब मैं तेरे आँगन में एक फूल की माँनिंद खिला तू देख के मुझको जीती थी मैरे आँसू पीती थी माँ ओ माँ! अक्सर डर कर मैं छुप जाता था तेरे आँचल में ख़ुशियों के सारे रंग मैं पाता था तेरे आँचल में
16
17
जिस तरह हम मनुष्य बाग के सबसे सुंदर फूल को तोड़ते हैं, वैसे ही इस संसाररूपी बगिया से सबसे सुंदर, सबसे सुगंधित और सबसे कीमती फूल को ईश्वर बहुत जल्दी तोड़ लेता है और जब वह ऐसा करता है तो मानव समाज में इस प्रक्रिया को मृत्यु कहा जाता है।
17
18
सिरफिरे लोग हमें दुश्मने जाँ कहते हैं हम जो इस मुल्क की मिट्टी को भी माँ कहते हैं मुझे बस इसलिए अच्छी बहार लगती है कि ये भी माँ की तरह खुशग्वार लगती है मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आँसू मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना
18
19

इस खुशी से वंचित न करो

गुरुवार,मई 8, 2008
माँ का फोन आया तो सदा की तरह चित्त प्रसन्न हो गया। स्वयं माँ बने एक अरसा हो गया, पर अभी भी माँ से बातें करने की, उनकी आवाज सुनने की प्रतीक्षा रहती है। इस बार माँ की आवाज में हल्का क्रोध, उलाहना और डाँट का पुट देखकर हमेशा की तरह चहक नहीं सकी।
19