वेब पत्रकारिता : नए जमाने का यंग मीडिया

-कमल शर्मा

स्पेस ही स्पेस : वेब मीडिया में स्पेस की कोई समस्या नहीं है। जबकि, एक अखबार जो आठ से बीस-चौबीस पेज का निकलता है, हरेक तरह की न्यू‍ज और व्यूज के लिए निश्चित जगह रखता है। इस वजह से अनेक समाचार-विचार छपने से वंचित रह जाते हैं। टीवी चैनल में तो यह समस्या इससे भी ज्यादा बड़ी है। वहां हम देखें तो एक चैनल कई कई घंटे तक सिर्फ पांच से छह खबरों में खेलते रहते हैं। इन खबरों का भी पूरा कवरेज नहीं होता या किसी मसले का गहराई से विश्लेषण नहीं किया जाता। एक समाचार को कुछ सैकंड से लेकर दो मिनट में निपटा दिया जाता है। जबकि, वेब में स्पेस की कोई दिक्कसत नहीं होती। यहां दो लाइन से लेकर हजारों लाइन तक की खबरें जारी की जा सकती हैं। इन समाचारों को अधिक आकर्षक एवं प्रामाणिक बनाने के लिए फोटो एवं वीडियो का साथ ही उपयोग किया जा सकता है। आप एक टीवी चैनल की तुलना में कहीं तेज गति से यहां ब्रेकिंग न्यूज दे सकते हैं। टीवी चैनल एक रिपोर्ट को शूट कर जब तक इसका प्रसारण करता है आप वेब मीडिया में उससे कई गुना तेजी से पूरी खबर को समूची दुनिया के सामने पेश कर बाजी मार सकते हैं। कई बड़ी घटनाओं और दुर्घटनाओं की सूचना जितनी तेजी से इस माध्याम से दी जा सकती है, वह मीडिया के अन्य किसी रूप में संभव नहीं है।


खबरों के अलावा भी बहुत कुछ : पर्यटन, होटल बुकिंग, रेल-हवाई टिकट, बीमा, कर्ज, बैंकिंग सेवाएं, शॉपिंग, कारोबार, जॉब, शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन सुविधाएं पाने के अलावा और तो और शादी-विवाह तक की झंझट से मुक्ति दिलाने में वेब मीडिया ने अहम भूमिका निभाई है। असल में ग्लोबलाइजेशन का अहम औजार वेब है जिसकी वजह से हम न केवल अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा कर पा रहे हैं बल्कि हर किसी को जानने, समझने के लिए हजारों किलोमीटर की यात्रा और खर्च से बचकर मिनटों में यह कार्य निपटा पा रहे हैं।
दिक्कतें : वेब मीडिया के विकास में अभी भी कुछ बाधाएं हैं। सबसे बड़ी दिक्कत इंटरनेट की दूरस्थ इलाकों में पहुंच न बन पाना, इंटरनेट की स्पीड का धीमा होना और बिजली की कमी है। साथ ही, कंप्यूपटर, लैपटॉप या नेटबुक के दाम अभी भी आम आदमी की पहुंच में नहीं है। आम आदमी पहले अपनी जरूरत घर को समझता है एवं वहां के खर्चों से बचने के बाद वह कंप्यूटर, लैपटॉप या बेहतर स्मार्ट फोन लेने की प्लानिंग करता है। अब बात हो रही है 4जी की लेकिन असलियत यह है कि देश में 2जी और 3जी का अमल भी ढंग से नहीं हुआ है। यदि यह अमल ईमानदारी और तत्परता से होता तो विकास की गति बेहतर रहती। इसके अलावा, वेब में मिल रही सूचनाओं की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठते हैं। ऐसी कई वेबसाइटस हैं जिनमें पुरानी सूचनाएं ही उपलब्ध हैं और इन्हें किसी न किसी कमी की वजह से अपडेट नहीं किया गया या यह भी सवाल उठ जाता है कि जो लिख रहा है वह उस योग्यता का है भी या नहीं। ऐसे में प्रामाणिकता को लेकर काफी मेहनत की जरूरत है। कई बार सही सामग्री खोजने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ता है, जिसे आसान बनाना होगा और ऐसे ऐसे नए सर्च इंजन विकसित करने होंगे जो एक विषय विशेष पर भरपूर सामग्री से भरे हों।

आसान आय : हम यदि आय की बात करें तो वेब मीडिया में इसकी स्थिति दिन प्रतिदिन सुधर रही है। सरकारी और निजी कंपनियां गांव गांव तक अपनी पहुंच बनाने के लिए वेब विज्ञापन का सहारा ले रही हैं। प्रिंट और टीवी चैनल में विज्ञापन की ऊंची दरें और सीमित पहुंच ने विज्ञापनदाताओं का नजरिया बदलना शुरू किया है। प्रिंट एवं टीवी चैनल में विज्ञापन लाने के लिए भी एक पूरी टीम रखनी होती है, लेकिन वेब में एक व्यक्ति खुद ही विज्ञापन के लिए बगैर कहीं गए सिर्फ एक ईमेल के जरिए अप्रोच कर सकता है। गूगल, जेडो, मैनहटन, कोमली सहित अनेक ऐसी एजेंसियां हैं जो वेबसाइटों के लिए विज्ञापन जारी करती हैं एवं उनके भुगतान सीधे बैंक खातों में करती हैं। केंद्र सरकार और अनेक राज्य सरकारें भी अब वेबसाइटों को विज्ञापन दे रही हैं, जिनसे इनके संचालकों को अच्छी खासी आय हो रही है। इसी तरह, यूट्‍यूब चैनल के माध्यम से आप अपने वीडियो पर रेवेन्यू पा सकते हैं। इंटरनेट एडवरटाइजिंग ब्यूरो के मुताबिक वर्ष 2011 में इंटरनेट विज्ञापन बाजार का आकार 72.18 अरब डॉलर था जो वर्ष 2013 में 31.5 फीसदी बढ़कर 94.97 अरब डॉलर पहुंच जाने की उम्मीद है। अखबार में समाचार और विज्ञापन का एक अनुपात है जिससे ज्यादा विज्ञापन लेने पर पाठकों की संख्या कम होने का डर रहता है जबकि टीवी चैनल में नियामक संस्था ट्राई ने यह आदेश जारी किया है कि कोई भी टीवी चैनल आने वाले अक्टूबर महीने से एक घंटे में 12 मिनट से ज्यादा के विज्ञापन नहीं दिखा सकेगा। जबकि वेब मीडिया में इस तरह की कोई सीमा नहीं है। यहां आपकी मेहनत और नए आइडिया आपको मनचाही आय दिला सकते हैं।

आपको मैं एक लघु कथा यहां बताना चाहता हूं। एक आभूषण निर्माता का बेटा रोज नए नए आभूषण बनाकर अपने पिता को दिखाता था लेकिन उसके पिता का हर बार यही जवाब होता था कि इसे और बेहतर बनाया जा सकता था जैसा कि उसके दोस्त का बेटा बनाता है। एक दिन उस लड़के ने पिता को एक आभूषण दिखाया और कहा कि यह उनके दोस्त के बेटे का बनाया हुआ है। पिता ने कहा इसे कहते हैं आभूषण। तब बेटे ने कहा कि पिताजी यह तो मैंने ही बनाया था। पिता ने मायूस होकर कहा- मेरे हर बार टोकने का अर्थ यह था कि मैं चाहता था तुम दुनिया के सबसे बेहतरीन कलाकार बनो, तुम्हारी कला में और निखार आए लेकिन तुम अब वह मेहनत नहीं कर पाओगे जो करनी चाहिए थी।
आप चाहे कंटेट राइटर, रिपोर्टर, एडिटर, ग्राफिक्स निर्माता, मल्टी मीडिया पर्सन, विज्ञापन लेखक सहित किसी भी रूप में अपना करियर चुनें लेकिन जिस भी क्षेत्र में जाना चाहते हैं, रोज जमकर अभ्यास करें। अपनी भूलों को सुधारें, नए आइडिया खोजें, उन पर काम करें, कम बोलें, अधिक सुनें, आम जन का आदर करें। आपको शानदार करियर बनाने से कोई नहीं रोक पाएगा



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