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Last Modified: बुधवार, 19 नवंबर 2025 (16:11 IST)

नक्सलियों से मुठभेड़ में शहीद हुए हॉकफोर्स के इंस्पेक्टर आशीष शर्मा, सीएम ने जताया दुख, कहा अविस्मरणीय है उनका बलिदान

Hawk Force Inspector Ashish Sharma martyred in Naxal encounter
भोपाल। मध्यप्रदेश की हॉकफोर्स में तैनात एसआई आशीष शर्मा नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हो गए है। मूल रूप से नरसिंहपुर जिले के रहने वाले आशीष शर्मा छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव के जंगलों में पेट्रोलिंग कर रहे थे। उस दौरान नक्सलियों ने फोर्स पर फायरिंग कर दी। इस फायरिंग में शर्मा घायल हो गए। उन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
 
गौरतलब है कि नक्सलियों का सफाया करने में जुटी फोर्स राजनांदगांव के बेबर टोला बांध-कंगूरा मैदान और कुर्रेझरी के जंगल में संयुक्त अभियान चला रही है। यह अभियान छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश-महाराष्ट्र की टीमें संयुक्त रूप से चला रही हैं। इसमें राजनादगांव की 3, गोंदिया की 7 और बालाघाट की 12 पुलिस पार्टियां शामिल थीं। आज सुबह 6 बजे फोर्स ने जंगल में सर्चिंग शुरू की। उसके दो घंटे बाद करीब 8 बजे नक्सलियों ने फोर्स पर हमला बोल दिया। नक्सलियों ने पुलिस पर तीन-चार राउंड फायर किए। 

जानकारी के मुताबिक, इस फायरिंग में हॉक फोर्स के इंस्पेक्टर आशीष शर्मा को जांघ और कंधे में गोली लग गई। इसके बाद एडिशनल एसपी आदर्श कांत शुक्ला और बैहर एसडीओपी ओम प्रकाश शर्मा को एंबुलेंस में लेकर अस्पताल पहुंचे। यहां इलाज के दौरान शर्मा ने दम तोड़ दिया। बता दें, शहीद शर्मा मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के रहने वाले थे। वे साल 2016 में विशेष सशस्त्र बल में शामिल हुए थे। उन्होंने साल 2018 में हॉक फोर्स जॉइन की थी। उनकी बहादुरी और काम को देखते हुए सरकार ने दो बार आउट ऑफ टर्न प्रमोशन भी दिया था।   
 
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस शहादत पर कहा कि आज मप्र हॉक फोर्स के निरीक्षक आशीष शर्मा नक्सलियों से मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त हुए। मैं उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की संयुक्त टीम द्वारा छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव के जंगलों में नक्सल विरोधी ऑपरेशन के दौरान उन्होंने अभूतपूर्व वीरता और साहस का प्रदर्शन किया। नक्सल उन्मूलन के राष्ट्रीय अभियान में उनका सर्वोच्च बलिदान अविस्मरणीय रहेगा। उन्हें पूर्व में कर्तव्य के दौरान अदम्य साहस, असाधारण बहादुरी प्रदर्शित करने के लिए दो बार भारत सरकार द्वारा वीरता पदक से सम्मानित किया गया था।
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