सम्बंधित जानकारी
- मध्यप्रदेश में AAP सभी 230 सीटों पर लड़ेगी विधानसभा चुनाव, अरविंद केजरीवाल संभालेंगे कमान
- किसानों के साथ आदिवासी वोट बैंक को भी साधेगी BJP सरकार की मिलेट्स प्रमोशन नीति
- कांग्रेस में गुटबाजी का जिन्न, बोले जीतू पटवारी, मैं हूं कार्यकारी अध्यक्ष, पीसीसी को हटाने का अधिकार नहीं
- MP : धार, देवास और खरगोन में आसमान में दिखाई दी रहस्यमयी चमकीली आकृति, लोगों में फैली सनसनी
- भोपाल का इस्लाम नगर अब कहलाएगा जगदीशपुर, भोपाल को भोजपाल करने की भी मुहिम तेज
मध्यप्रदेश में PFI पर शिकंजा, सरकार के खिलाफ साजिश के आरोप में 3 और गिरफ्तार
भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के तीन और सदस्यों को सरकार के खिलाफ साजिश रचने और गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में भोपाल से गिरफ्तार किया है।
इससे पहले पुलिस ने शुक्रवार को इसी मामले में श्योपुर निवासी पीएफआई के पदाधिकारी वासीद खान (26) को गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने शनिवार को पीएफआई के दो सदस्यों को भोपाल से गिरफ्तार किया जबकि तीसरे सदस्य को पेशी वारंट पर औरंगाबाद (महाराष्ट्र) से मध्य प्रदेश लाए जाने के बाद गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार पीएफआई सदस्यों की पहचान धार जिले के निवासी गुलाम रसूल शाह (37), इंदौर निवासी साजिद खान उर्फ गुलाम नबी (56) और औरंगाबाद निवासी परवेज खान (30) के रूप में हुई है।
आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 121 ए (सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश), 153बी (राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाने वाले दावे), 20 बी (आपराधिक साजिश) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के प्रावधान के तहत मामला दर्ज किया गया है।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि परवेज खान 2017 से पीएफआई से जुड़ा हुआ था और कई मौकों पर प्रशिक्षण देने के लिए मध्य प्रदेश आया था। वह औरंगाबाद की एक जेल में बंद था और उसे शनिवार को पेशी वारंट पर भोपाल लाया गया था।
वहीं, गुलाम रसूल पीएफआई का सक्रिय सदस्य था जो राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर लोगों को संगठन के लिए काम करने के लिए प्रेरित करता था और गुलाम नबी पीएफआई का वित्तीय प्रबंधन संभालता था। तीनों आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश करने के बाद 8 फरवरी तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
गौरतलब है कि पिछले साल सितंबर में केंद्र ने इस्लामिक स्टेट जैसे वैश्विक आतंकी समूहों के साथ संबंध होने का आरोप लगाते हुए पीएफआई और उसके कई सहयोगियों को कड़े आतंकवाद विरोधी कानून के तहत पांच साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया था।
प्रतिबंध से पहले, NIA, ED और विभिन्न राज्य पुलिस बलों ने पीएफआई पर बड़े पैमाने पर छापे मारे थे और विभिन्न राज्यों से संगठन के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को देश में आतंकी गतिविधियों का समर्थन करने के आरोप में गिरफ्तार किया था।
