निशाने पर अरबपति नौकरशाह
वेतन से ज्यादा भरते हैं बीमा की किस्तें
आयकर विभाग ने मध्यप्रदेश-छत्तीसग़ढ़ के करीब 75 नौकरशाहों व व्यापारियों को नोटिस भेजकर रातों-रात उनके अमीर बनने की कहानी पूछ ली है। इनमें से कुछ तो सचिव स्तर के अधिकारी हैं। इनकी संपत्ति और आय के स्रोत की छानबीन से सरकार चलाने वाले इन ब्यूरोक्रेटों की रातों की नींद उ़ड़ गई है। कुछ ऐसे हैं जो अचानक अरबपति बन बैठे, पर गिनती अमीरों की सूची में नहीं है। विभाग को सबसे ज्यादा अचरज तो इन नौकरशाहों के शाही खर्च, जीवन शैली और इनके द्वारा विभिन्ना मदों में किए गए अकूत संपत्ति निवेश के ब्यौरे से हो रहा है। इन नवधनाढ्यों में कुछ भारतीय प्रशासनिक सेवाओं के अधिकारी भी हैं, जिनमें कई सचिव स्तर के पदों पर कार्यरत हैं।साथ ही इस सूची में कुछ ऐसे व्यापारी भी शरीक हैं जो अचानक ही धनकुबेरों में शुमार होने लगे हैं। जाँच में दिलचस्प तथ्य यह भी उजागर हुआ है कि कई अफसर ऐसे हैं, जिनकी बीमें की किस्त उनके वेतन से ज्यादा है। बीमे में 3 से लेकर 15 लाख रुपए तक सालाना निवेश करने वाले अधिकारियों की लंबी सूची है। आयकर विभाग की प्रारंभिक खोजबीन में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। दोनों ही राज्यों के ऐसे छोटे-ब़ड़े अधिकारियों ने रिश्वत लेने के नायाब तरीके ईजाद कर लिए हैं।कुछ नौकरशाहों की अपने रिश्तेदारों के नाम से कागजों पर दस-दस कंपनियाँ चल रही हैं। इन कंपनियों का कोई उत्पादन अथवा ट्रेडिंग रिकॉर्ड नहीं है, इसके बावजूद इनके बैंक खातों में आए दिन लाखों रुपए की आवक-जावक हो रही है। विभाग को जो तथ्य मिले हैं, उनमें इन नौकरशाहों ने ससुराल पक्ष के लोगों के नाम पर बड़ी रकम का निवेश किया है। सवा करोड़ का निवेश : विभाग को धमतरी (छग) के एक रेंजर के यहाँ भी बड़ी मात्रा में गैर आनुपातिक संपत्ति मिली है। उधर भोपाल में लोनिवि के एक अधीक्षण यंत्री जेके भासने द्वारा सवा करो़ड़ रुपए के निवेश की जाँच प़ड़ताल अभी चल ही रही है। भासने की पत्नी भारती ने 50 लाख रुपए के निवेश करते वक्त घर का पता घंटाघर जबलपुर का लिखा दिया था, जो फर्जी है। उसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। योगीराज का मामला फीका : आयकर अधिकारियों का मानना है कि इन मामलों के सामने योगीराज मामला भी फीका पड़ जाएगा। पिछले साल मप्र में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के यहाँ हुई छापामारी में करोड़ों रुपए की अघोषित संपत्ति मिली थी।