Sonia came in support of Manmohan | सोनिया ने सुनाई खरी-खरी
भाजपा और वामदलों को आड़े हाथों लेते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने बुधवार को कहा कि यह शर्मनाक है कि प्रधानमंत्री की आलोचना के लिए दोनों पार्टियों ने एक-दूसरे से हाथ मिला लिया है और उनके लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं।
अपने एक दिन के तूफानी दौरे में उत्तरी केरल के वाटाकारा में एक चुनावी रैली में सोनिया ने कहा डॉ. मनमोहनसिंह पर भाजपा और माकपा की तरफ से हमला किया जाना शर्मनाक है। जब एक व्यक्ति प्रधानमंत्री होता है तो वह चाहे वह कांग्रेस का हो या अन्य पार्टी का वह देश का प्रधानमंत्री होता है।
उन्होंने कहा मैं स्तब्ध हूँ कि भाजपा और वाम दलों के वरिष्ठ नेता हमारे प्रधानमंत्री के खिलाफ नकारात्मक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं।
उन्होंने भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी द्वारा मनमोहनसिंह को बार-बार कमजोर प्रधानमंत्री बताए जाने के मामले में सिंह का बचाव किया।
वाम दलों को घेरते हुए सोनिया ने कहा कि वामदल इस बात को नजरअंदाज कर रहे हैं कि मनमोहनसिंह ने पूरी ईमानदारी के साथ काम किया है। हम खुशनसीब हैं कि हमें उनके जैसा प्रधानमंत्री मिला हैं।
वामपंथियों की धर्मनिरपेक्षता पर सवाल उठाते हुए सोनिया ने कहा कि उन्होंने दो बार भाजपा के साथ हाथ मिलाया है। यह कांग्रेस है, जिसने कभी भी भाजपा की विचारधारा से समझौता नहीं किया।
अपने एक दिन के तूफानी दौरे में उत्तरी केरल के वाटाकारा में एक चुनावी रैली में सोनिया ने कहा डॉ. मनमोहनसिंह पर भाजपा और माकपा की तरफ से हमला किया जाना शर्मनाक है। जब एक व्यक्ति प्रधानमंत्री होता है तो वह चाहे वह कांग्रेस का हो या अन्य पार्टी का वह देश का प्रधानमंत्री होता है।
उन्होंने कहा मैं स्तब्ध हूँ कि भाजपा और वाम दलों के वरिष्ठ नेता हमारे प्रधानमंत्री के खिलाफ नकारात्मक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं।
उन्होंने भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी द्वारा मनमोहनसिंह को बार-बार कमजोर प्रधानमंत्री बताए जाने के मामले में सिंह का बचाव किया।
वाम दलों को घेरते हुए सोनिया ने कहा कि वामदल इस बात को नजरअंदाज कर रहे हैं कि मनमोहनसिंह ने पूरी ईमानदारी के साथ काम किया है। हम खुशनसीब हैं कि हमें उनके जैसा प्रधानमंत्री मिला हैं।
वामपंथियों की धर्मनिरपेक्षता पर सवाल उठाते हुए सोनिया ने कहा कि उन्होंने दो बार भाजपा के साथ हाथ मिलाया है। यह कांग्रेस है, जिसने कभी भी भाजपा की विचारधारा से समझौता नहीं किया।
