बुंदेलखंड को लेकर सभी बेचैन
अब तक नहीं हुई प्रत्याशियों की घोषणा
पंद्रहवी लोकसभा के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद राजनीतिक दलों में उम्मीदवार चयन के लिए जारी उठापठक तेज हुई है, लेकिन कोई भी दल अभी तक बुंदेलखण्ड की चार लोकसभा सीटों के लिए अपने प्रत्याशी तय नहीं कर पाया है। इसकी एक वजह क्षेत्र में भाजश, सपा व बसपा की बढ़ती पैठ बताई जा रही है।
परिसीमन की वजह से बुंदेलखण्ड क्षेत्र के चुनावी समीकरणों में आए बदलावों से भी राजनीतिक दल उलझन में नजर आ रहे हैं। परिसीमन के बाद बुंदेलखंड में लोकसभा सीटों की संख्या तीन से बढ़कर चार हो गई है।
संभाग के पाँचों जिलों के अंतर्गत आने वाले विधानसभा क्षेत्रों में किए गए फेरबदल और संभाग से बाहर के जिलों की कुछ विधानसभा सीटों को बुंदेलखंड क्षेत्र में शामिल किए जाने से राजनीतिक दलों की उलझन बढ़ गई है।
इस बार बुंदेलखंड में करीब चार लोकसभा सीटों सागर, दमोह, खजुराहों व टीकमगढ़ में से सागर के स्थान पर टीकमगढ़ सीट अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित की गई है।
इस कश्मकश का असर आरक्षित सीट टीकमगढ़ पर भी नजर आ रहा है, लेकिन सागर जिले की तीन विधानसभा सीटों बंडा, रहली और देवरी के दमोह लोकसभा क्षेत्र में जाने तथा विदिशा जिले की तीन विधानसभा सीटों शमशाबाद, कुरवई और सिरोंज के सागर में शामिल होने से ये सीटें अब किसी भी राजनीतिक दल का गढ़ नहीं रह गई हैं।
राजनीतिक हलकों में बुंदेलखंड की राजनीति से जातीय समीकरण की बढ़ती अहमियत का कारण उप्र से लगा होना बताया जा रहा है। पिछले कुछ चुनाव में कमोबेश सभी राजनीतिक दलों ने प्रत्याशियों के चयन में जातिवादी पहलुओं को खास तवज्जो दी है।
इस लिहाज से सागर जिले के बंडा व देवरी को लोधियों और रहली को कुर्मियों के वर्चस्व वाला विधानसभा क्षेत्र माना जाता है। दमोह में भी लोधियों को दबदबा माना जाता है। परिसीमन के बाद दमोह लोकसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं में से करीब 25 फीसदी मतदाता लोधी एवं कुर्मी जाति के हैं।
दमोह लोकसभा सीट पर चंद्रभानसिंह के अलावा कांग्रेस के प्रदेश सचिव राजेश राजपूत एवं पार्टी की स्टार प्रचारक साधना भारती के पिता के नाम को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है।
बंडा से भाजपा के पूर्व विधायक शिवराजसिंह लोधी और दमोह से भाजपा के पूर्व विधायक दशरथसिंह लोधी, जिला अध्यक्ष विद्यासागर पांडे, प्रवक्ता सुधा मलैया तथा गोपाल भार्गव के पुत्र दीपू भार्गव टिकिट की दौड़ में शामिल बताए जा रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ कांग्रेस खेमे में सागर के व्यवसायी संतोष साहू, नरेश जैन और अरविन्द भाई पटेल, बीना से प्रभुसिंह ठाकुर टिकट की दौड़ में शामिल हैं।
भाजपा खेमे में प्रदेश महामंत्री भूपेन्द्रसिंह ठाकुर, जिला पंचायत अध्यक्ष हरवंशसिंह राठौर, पूर्व विधायक सुधा जैन, कृष्णमुरारी मोघे तथा सुधाकर बापट टिकिट की आस लगाए बैठे हैं।
टीकमगढ़ सीट के लिए भाजपा के दावेदारों में सागर के पूर्व सांसद वीरेन्द्रकुमार, आदिम जाति कल्याण मंत्री हरिशंकर खटीक, पूर्व गृह राज्यमंत्री रामदयाल अहिरवार, किरण अहिरवार और गोपालसिंह राय प्रमुख हैं। कांग्रेस में प्रदेश सचिव वृंदावन अहिरवार, आनंद अहिरवार, कमलेश वर्मा, नगर पंचायत निवाड़ी की अध्यक्ष पुष्पा कोरी, अरविंद खटीक, पर्वतलाल अहिरवार और मालती मौर्य के नाम लिए जा रहे हैं।
नवगठित खजुराहो संसदीय सीट भी आकर्षण केन्द्र है। पन्ना एवं छतरपुर जिले के विधासभा क्षेत्रों के इस सीट में शामिल होने से क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण भी कुछ पेचीदा हो गए हैं। इस सीट पर कांग्रेस की ओर से बुंदेलखंड के कद्दावर नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी के अलावा हटा के पूर्व विधायक राजा पटेरिया दावेदार हैं, वहीं भाजपा की ओर से बिजावर के पूर्व विधायक जितेन्द्रसिंह बुंदेला एवं पवई के पूर्व विधायक वीर विक्रमसिंह टिकट की दौड़ में शामिल हैं, लेकिन बुंदेलखंड पर चर्चा बहुजन समाज पार्टी व भारतीय जनशक्ति पार्टी का जिक्र किए बिना पूरी नही हो सकती है। टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना व दमोह क्षेत्र में इन दोनों ही पार्टियों का प्रदर्शन हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में सीटों के लिहाज से न सही पर मतों विभाजन के हिसाब से बेहतर रहा है।
बसपा विधानसभा चुनावों की भाँति लोकसभा चुनावों में भी प्रदेश की सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करेगी और बुंदेलखण्ड में उसे कमतर आँकने का खमियाजा राजनीतिक दलों के लिए महँगा पड़ सकता है।
भाजश ने भी घोषणा की थी कि पार्टी प्रदेश के उन सभी लोकसभा क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार खडे़ करेगी, जिन क्षेत्रों में पार्टी को हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में 60 हजार से एक लाख तक मत मिले हैं। इस लिहाज से भाजश मप्र की जिन 11 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली है, उनमें से 3 सीटें बुंदेलखण्ड की हैं।
भाजश को दमोह, खजुराहो एवं टीकमगढ़ क्षेत्र में 90 हजार से लेकर एक लाख के बीच मत मिले हैं, इसलिए भाजश बुंदेलखण्ड में कांग्रेस और खासकर भाजपा का खेल बिगाड़ सकती है।
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संभाग के पाँचों जिलों के अंतर्गत आने वाले विधानसभा क्षेत्रों में किए गए फेरबदल और संभाग से बाहर के जिलों की कुछ विधानसभा सीटों को बुंदेलखंड क्षेत्र में शामिल किए जाने से राजनीतिक दलों की उलझन बढ़ गई है।
इस बार बुंदेलखंड में करीब चार लोकसभा सीटों सागर, दमोह, खजुराहों व टीकमगढ़ में से सागर के स्थान पर टीकमगढ़ सीट अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित की गई है।
इस कश्मकश का असर आरक्षित सीट टीकमगढ़ पर भी नजर आ रहा है, लेकिन सागर जिले की तीन विधानसभा सीटों बंडा, रहली और देवरी के दमोह लोकसभा क्षेत्र में जाने तथा विदिशा जिले की तीन विधानसभा सीटों शमशाबाद, कुरवई और सिरोंज के सागर में शामिल होने से ये सीटें अब किसी भी राजनीतिक दल का गढ़ नहीं रह गई हैं।
राजनीतिक हलकों में बुंदेलखंड की राजनीति से जातीय समीकरण की बढ़ती अहमियत का कारण उप्र से लगा होना बताया जा रहा है। पिछले कुछ चुनाव में कमोबेश सभी राजनीतिक दलों ने प्रत्याशियों के चयन में जातिवादी पहलुओं को खास तवज्जो दी है।
इस लिहाज से सागर जिले के बंडा व देवरी को लोधियों और रहली को कुर्मियों के वर्चस्व वाला विधानसभा क्षेत्र माना जाता है। दमोह में भी लोधियों को दबदबा माना जाता है। परिसीमन के बाद दमोह लोकसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं में से करीब 25 फीसदी मतदाता लोधी एवं कुर्मी जाति के हैं।
दमोह लोकसभा सीट पर चंद्रभानसिंह के अलावा कांग्रेस के प्रदेश सचिव राजेश राजपूत एवं पार्टी की स्टार प्रचारक साधना भारती के पिता के नाम को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है।
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भाजपा खेमे में प्रदेश महामंत्री भूपेन्द्रसिंह ठाकुर, जिला पंचायत अध्यक्ष हरवंशसिंह राठौर, पूर्व विधायक सुधा जैन, कृष्णमुरारी मोघे तथा सुधाकर बापट टिकिट की आस लगाए बैठे हैं।
टीकमगढ़ सीट के लिए भाजपा के दावेदारों में सागर के पूर्व सांसद वीरेन्द्रकुमार, आदिम जाति कल्याण मंत्री हरिशंकर खटीक, पूर्व गृह राज्यमंत्री रामदयाल अहिरवार, किरण अहिरवार और गोपालसिंह राय प्रमुख हैं। कांग्रेस में प्रदेश सचिव वृंदावन अहिरवार, आनंद अहिरवार, कमलेश वर्मा, नगर पंचायत निवाड़ी की अध्यक्ष पुष्पा कोरी, अरविंद खटीक, पर्वतलाल अहिरवार और मालती मौर्य के नाम लिए जा रहे हैं।
नवगठित खजुराहो संसदीय सीट भी आकर्षण केन्द्र है। पन्ना एवं छतरपुर जिले के विधासभा क्षेत्रों के इस सीट में शामिल होने से क्षेत्र के राजनीतिक समीकरण भी कुछ पेचीदा हो गए हैं। इस सीट पर कांग्रेस की ओर से बुंदेलखंड के कद्दावर नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी के अलावा हटा के पूर्व विधायक राजा पटेरिया दावेदार हैं, वहीं भाजपा की ओर से बिजावर के पूर्व विधायक जितेन्द्रसिंह बुंदेला एवं पवई के पूर्व विधायक वीर विक्रमसिंह टिकट की दौड़ में शामिल हैं, लेकिन बुंदेलखंड पर चर्चा बहुजन समाज पार्टी व भारतीय जनशक्ति पार्टी का जिक्र किए बिना पूरी नही हो सकती है। टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना व दमोह क्षेत्र में इन दोनों ही पार्टियों का प्रदर्शन हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में सीटों के लिहाज से न सही पर मतों विभाजन के हिसाब से बेहतर रहा है।
बसपा विधानसभा चुनावों की भाँति लोकसभा चुनावों में भी प्रदेश की सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े करेगी और बुंदेलखण्ड में उसे कमतर आँकने का खमियाजा राजनीतिक दलों के लिए महँगा पड़ सकता है।
भाजश ने भी घोषणा की थी कि पार्टी प्रदेश के उन सभी लोकसभा क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार खडे़ करेगी, जिन क्षेत्रों में पार्टी को हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में 60 हजार से एक लाख तक मत मिले हैं। इस लिहाज से भाजश मप्र की जिन 11 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली है, उनमें से 3 सीटें बुंदेलखण्ड की हैं।
भाजश को दमोह, खजुराहो एवं टीकमगढ़ क्षेत्र में 90 हजार से लेकर एक लाख के बीच मत मिले हैं, इसलिए भाजश बुंदेलखण्ड में कांग्रेस और खासकर भाजपा का खेल बिगाड़ सकती है।

