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जान से प्यारा
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कुलवंत हैपी पानी की लहर की तरह आए वोऔर चले गए हम किनारों की तरह देखते रहे ये मंजरउस मासूम को क्या मालूमउनकी जुदाई घोंप गई हमारे सीने में बिरह का खंजरउनके आने से आई जिंदगी में बहार वो क्या जानेजाने से उनके हुई जिंदगी बंजर हमारी नींद चैन हर खुशी ले गया वो जान से प्याराहैपी अब हमारे पास रह गया पंजर।