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अकेलापन
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आशा भाटियाअकेलेपन की दास्ताँ किसको मैं सुनाऊँन मर पाऊ, न जी पाऊँजिन्दगी को मैं तो समझ न पाऊँ ।हर मोड़ पर मिल जाते हैं कुछ लोगदो कदम साथ चल कर मुड़ जाते हैं कुछ लोगपल दो पल का साथ सबका हम तो रह गए अकेले अकेलेपन की दास्ताँ किसको मैं सुनाऊँ ।कभी तो लगे ये उड़ते पंछी है साथीकभी तो लगे ये मुस्कुराते फूल है साथीपल दो पल ........................अकेलेपन की दास्ताँ किसको मैं सुनाऊँ ।जिन्दगी भी हँस पड़ी खिलखिलाकर मौत भी भागे दामन छुड़ाकर पल दो पल का साथ सब काखुशी भी झांके बादलों की ओट सेछलनी हो जाए कलेजा दुनिया की चोट से अकेलेपन की दास्ताँ किसको मैं सुनाऊँ ।जिन्दगी बन कर खड़ी है, हर पल एक सवाल हर जवाब खुद बन जाए फिर एक सवाल पल दो पल का साथ सबकाअकेलेपन की दास्ताँ किसको मैं सुनाऊँ ।