हस्तरेखाओं का महत्व
. विकास शुक्ला
मनुष्य की प्रकृति के विश्लेषण, अध्ययन एवं परीक्षण करने के जितने भी माध्यम हैं, उनमें हस्तरेखा विज्ञान का विशेष महत्व है। हाथ मनुष्य के आचरण व व्यवहार रूपी बक्से की चाबी है, जिसके भीतर प्रकृति ने प्रेरक शक्ति और उसकी उन अंतर्निहित क्षमताओं, गुणों एवं कार्यशक्ति को बंद किया हुआ है, जिनके द्वारा हम स्वयं को पहचानकर अपने जीवन को रूपांतरित कर सकते हैं। हमारे धार्मिक ग्रंथों में भी लिखा है कि-
कराग्रे वस्ते लक्ष्मी, कर मध्ये सरस्वती।
कर पृष्ठे स्थितो ब्रह्मा, प्रभाते कर दर्शनम्॥
ये दो पंक्तियाँ हाथ के महत्व को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से हमारे हाथ में सभी देवताओं का निवास है और भौतिक दृष्टि से मनुष्य की उज्ज्वलता, प्रखरता व कार्यशैली का पुंज है। हमारा जीवन परिवर्तनशील है और जीवन संघर्ष का, घात-प्रतिघातों का यह संपूर्ण रूप से प्रतिबिंब है, जिसके माध्यम से हम भूत को जानकर विश्वास करते हैं व वर्तमान को समझते हैं।
प्रायः सभी व्यक्तियों के हाथ एक ही प्रकार के नहीं होते, न ही रेखाएँ व योग। सभी में भिन्नता होती है।
मुख्यतः हाथ 7 प्रकार के होते हैं, जिनका क्रम इस प्रकार है-
1. अविकसित अथवा निम्न श्रेणी के हाथ।
2. चमचाकार अथवा गतिशील हाथ।
3. दार्शनिक अथवा गाँठदार हाथ।
4. नुकीले अथवा कलात्मक हाथ।
5. आदर्श हाथ।
6. मिश्रित हाथ।
7. वर्गाकार अथवा उपयोगी हाथ।
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कराग्रे वस्ते लक्ष्मी, कर मध्ये सरस्वती।
कर पृष्ठे स्थितो ब्रह्मा, प्रभाते कर दर्शनम्॥
ये दो पंक्तियाँ हाथ के महत्व को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से हमारे हाथ में सभी देवताओं का निवास है और भौतिक दृष्टि से मनुष्य की उज्ज्वलता, प्रखरता व कार्यशैली का पुंज है। हमारा जीवन परिवर्तनशील है और जीवन संघर्ष का, घात-प्रतिघातों का यह संपूर्ण रूप से प्रतिबिंब है, जिसके माध्यम से हम भूत को जानकर विश्वास करते हैं व वर्तमान को समझते हैं।
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प्रायः सभी व्यक्तियों के हाथ एक ही प्रकार के नहीं होते, न ही रेखाएँ व योग। सभी में भिन्नता होती है।
मुख्यतः हाथ 7 प्रकार के होते हैं, जिनका क्रम इस प्रकार है-
1. अविकसित अथवा निम्न श्रेणी के हाथ।
2. चमचाकार अथवा गतिशील हाथ।
3. दार्शनिक अथवा गाँठदार हाथ।
4. नुकीले अथवा कलात्मक हाथ।
5. आदर्श हाथ।
6. मिश्रित हाथ।
7. वर्गाकार अथवा उपयोगी हाथ।
